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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के जिन तीन प्रोफेसरों के खिलाफ अर्थशास्त्र विभाग की महिला असिस्टेंट प्रोफेसर ने एससी-एसटी एक्ट एवं यौन उत्पीड़न सहित आईपीसीए की विभिन्न धाराओं में वर्ष 2016 में एफआईआर दर्ज कराई थी, उस मामले की जांच इविवि प्रशासन ने भी एक कमेटी के माध्यम से कराई थी। जांच में असिस्टेंट प्रोफेसर की शिकायत को निराधार पाते हुए तीनाें प्रोफेसरों को आरोपों से बरी कर दिया गया था।
इविवि की पीआरओ प्रो. जया कपूर के अनुसार इविवि प्रशासन ने भी महिला असिस्टेंट प्रोफेसर की शिकायत को गंभीरता से लिया था और तत्कालीन कुलपति ने इसकी जांच नियमानुसार गठित कमेटी सीकैश को दे दी थी। समिति ने मामले की विस्तृत पड़ताल की थी। कमेटी की जांच में शिकायत पूरी तरह से निराधार पाई गई थी। इस दौरान महिला असिस्टेंट प्रोफेसर ने समिति द्वारा भेजे गए सवालों के जवाब भी नहीं दिए थे और अपने आरोपों के संबंध में कोई साक्ष्य भी समिति के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए थे।
समिति को असिस्टेंट प्रोफेसर के सहकर्मियों ने बताया था कि वह असहयोगी और अवज्ञापूर्ण हैं। वहीं, तीनों आरोपित शिक्षकों प्रो. मनमोहन कृष्ण, प्रो. प्रहलाद कुमार एवं जावेद अख्तर के आचरण से किसी भी प्रकार की कोई शिकायत सामने नहीं आई थी। महिला असिस्टेंट प्रोफेसर के असहयोग एवं अपनी शिकायत के पक्ष में साक्ष्य न दे पाने के कारण समिति ने असिस्टेंट प्रोफेसर की शिकायत को विभाग एवं उसके वरिष्ठ प्रोफेसरों और इलाहाबाद विश्वविद्यालय की मानहानि से प्रेरित पाया था।
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