ऊसरी कांड: आज कोर्ट में एक साथ पेश होंगे यूपी के दो डॉन, मुख्तार अंसारी और बृजेश सिंह आमने-सामने

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ब्रजेश सिंह और मुख्तार अंसारी

ब्रजेश सिंह और मुख्तार अंसारी
– फोटो : Amar Ujala

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21 साल पुराने ऊसरी कांड में मंगलवार को मुख्तार अंसारी को जनपद के एमपी-एमएलए कोर्ट में तलब किया गया है। सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा की दृष्टि से उसके कोर्ट में आने की संभावना नहीं है। एमपी-एमएलए कोर्ट ने मुख्तार अंसारी और माफिया डॉन बृजेश सिंह को फिजिकली तलब किया है। जिसके लिहाज से आज का दिन पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती वाला रहेगा। 

बता दे कि जेल अधिकारी को धमकाने के मामले में मुख्तार को मिली सजा पर सुप्रीम कोर्ट के कदम से उसके परिवार को राहत मिली है। अब परिवार पिछले दिनों गैंगस्टर मामले में जनपद की अदालत से हुई 10 साल की सजा पर भी ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है।
मुख्तार के बड़े भाई सांसद अफजाल अंसारी का कहना है कि वर्ष 2002 में टाडा केस में भी मुख्तार को 10 साल की सजा हुई थी। जब सुप्रीम कोर्ट गए तो वहां फैसला पलट दिया गया। देश में कानून का राज है। यहां सभी को ऊपरी अदालत में जाने का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि गैंगस्टर के मामले में भी सर्वोच्च अदालत में जाने का रास्ता है। इसको भी हाईकोर्ट में सुनने लायक विषय मान लिया गया था, लेकिन वहां सुनवाई होने से पहले ही जनपद की कोर्ट ने सजा सुना दी। जिससे वहां सुनवाई नहीं हो सकी। आगे फिर अपील की जाएगी।

 

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21 साल पुराने ऊसरी कांड में मंगलवार को मुख्तार अंसारी को जनपद के एमपी-एमएलए कोर्ट में तलब किया गया है। सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा की दृष्टि से उसके कोर्ट में आने की संभावना नहीं है। एमपी-एमएलए कोर्ट ने मुख्तार अंसारी और माफिया डॉन बृजेश सिंह को फिजिकली तलब किया है। जिसके लिहाज से आज का दिन पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती वाला रहेगा। 

बता दे कि जेल अधिकारी को धमकाने के मामले में मुख्तार को मिली सजा पर सुप्रीम कोर्ट के कदम से उसके परिवार को राहत मिली है। अब परिवार पिछले दिनों गैंगस्टर मामले में जनपद की अदालत से हुई 10 साल की सजा पर भी ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है।

मुख्तार के बड़े भाई सांसद अफजाल अंसारी का कहना है कि वर्ष 2002 में टाडा केस में भी मुख्तार को 10 साल की सजा हुई थी। जब सुप्रीम कोर्ट गए तो वहां फैसला पलट दिया गया। देश में कानून का राज है। यहां सभी को ऊपरी अदालत में जाने का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि गैंगस्टर के मामले में भी सर्वोच्च अदालत में जाने का रास्ता है। इसको भी हाईकोर्ट में सुनने लायक विषय मान लिया गया था, लेकिन वहां सुनवाई होने से पहले ही जनपद की कोर्ट ने सजा सुना दी। जिससे वहां सुनवाई नहीं हो सकी। आगे फिर अपील की जाएगी।

 



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