ठंड पडने से बच्चे को गर्म कपडे़ पहनाकर जाती युवती – फोटो : अमर उजाला
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अचानक बढ़ी सर्दी बच्चों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। यह शिशुओं के लिए और भी खतरनाक हो सकता है। शिशुओं में ब्रांकोलाइटिस, निमोनिया और डायरिया जैसी जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं। हालांकि थोड़ी सावधानी बरतकर इससे बच्चों को बचाया जा सकता है।
पिछले कई दिनों से पहाड़ों पर बर्फबारी और हवाओं के चलने से एक सप्ताह से मौसम में नमी और ठंडक बढ़ गई है। अचानक बदले मौसम की चपेट में सभी आयु वर्ग के लोग आ सकते हैं, लेकिन नवजात शिशु और बच्चे जल्दी इसकी चपेट में आ जाते हैं।
महिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनूप शर्मा ने बताया कि अचानक ठंड और मौसम में नमी बढ़ने से छह माह तक के बच्चों में बीमारियों का खतरा अधिक बढ़ जाता है। इसमें ब्रांकोलाइटिस, खांसी, जुकाम, निमोनिया और कोल्ड डायरिया जैसी बीमारियां अधिक होती हैं। सामान्य सर्दी और जुकाम भी बच्चों को अपनी चपेट में लेता है। उन्होंने बताया ब्रांकोलाइटिस में सांस नली में संक्रमण होने से बच्चों को सांस लेने में दिक्कत हो जाती है। जुकाम और खांसी भी बढ़ जाती है। बच्चे को उल्टी और दस्त शुरू हो जाते हैं।
यदि बीमारी गंभीर रुप ले ले तो पसलियां भी चलने लगती हैं। तेज बुखार हो जाता है। ऐसी स्थिति में यदि तत्काल बच्चे को बेहतर उपचार न मिले तो संक्रमण फेफड़े तक पहुंच जाता है। यह स्थिति गंभीर होती है। इससे शरीर को पूरी मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है और खून में ऑक्सीजन की कमी से शरीर नीला पड़ने लगता है। ऐसी स्थिति में बच्चे को तत्काल ऑक्सीजन देने की आवश्यकता होती है।
इसके अलावा जुकाम, खांसी और बुखार की दवाओं के अलावा बीमारी को रोकने के लिए एंटीबायोटिक की आवश्यकता होती है। इस मौसम में कोहरे के कारण बड़े लोगों में भी सांस की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में सांस के मरीजों को भी सावधान रहने की आवश्यकता होती है। यदि किसी को सांस लेने में दिक्कत हो तो तुरंत जिला अस्पताल या प्रशिक्षित डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. सूर्य प्रकाश ने बताया कि सर्दियों के मौसम में बचाव सबसे आवश्यक है। खासकर छोटे बच्चों और नवजात शिशुओं को हर समय गर्म कपड़ों में लपेटकर रखना चाहिए। ध्यान रखें बच्चे को नहलाएं नहीं, बल्कि यदि आवश्यक हो तो गर्म पानी में हल्का कपड़ा भिगोकर शरीर पोछ दें। बच्चों को ऐसे कमरे में रखें, जहां वातावरण गर्म हो, सीलन न हो। बच्चों को इस मौसम में आइसक्रीम और ठंडी चीजें खाने को बिल्कुल न दें।
सर्दी से सीने में दर्द हो रहा है। यह सब इस मौसम में एकदम से बढ़ी ठंड के कारण हो रहा है। उसी की दवा लेने के लिए अस्पताल आया हूं। -रमेशचंद्र, मरीज मौसम में गलनभरी ठंड होने के कारण सर्दी से बुखार आ गया है। दवा लेने के लिए जिला अस्पताल आया हूं, ताकि ठीक हो सकूं। -राधेश्याम, मरीज कई दिनों से सर्दी हो रही है। इस कारण तबियत काफी बिगड़ गई है। अब अस्पताल से दवा लेने के लिए आया हूं। -मंगलसेन, मरीज बेटे को सर्दी हो गई है। उसे स्थानीय स्तर पर दवा भी दिलवाई, लेकिन कोई फायदा न होने पर अब उसे जिला अस्पताल लेकर आई हूं। -अंगूरी देवी, तीमारदार
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अचानक बढ़ी सर्दी बच्चों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। यह शिशुओं के लिए और भी खतरनाक हो सकता है। शिशुओं में ब्रांकोलाइटिस, निमोनिया और डायरिया जैसी जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं। हालांकि थोड़ी सावधानी बरतकर इससे बच्चों को बचाया जा सकता है।
पिछले कई दिनों से पहाड़ों पर बर्फबारी और हवाओं के चलने से एक सप्ताह से मौसम में नमी और ठंडक बढ़ गई है। अचानक बदले मौसम की चपेट में सभी आयु वर्ग के लोग आ सकते हैं, लेकिन नवजात शिशु और बच्चे जल्दी इसकी चपेट में आ जाते हैं।
महिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनूप शर्मा ने बताया कि अचानक ठंड और मौसम में नमी बढ़ने से छह माह तक के बच्चों में बीमारियों का खतरा अधिक बढ़ जाता है। इसमें ब्रांकोलाइटिस, खांसी, जुकाम, निमोनिया और कोल्ड डायरिया जैसी बीमारियां अधिक होती हैं। सामान्य सर्दी और जुकाम भी बच्चों को अपनी चपेट में लेता है। उन्होंने बताया ब्रांकोलाइटिस में सांस नली में संक्रमण होने से बच्चों को सांस लेने में दिक्कत हो जाती है। जुकाम और खांसी भी बढ़ जाती है। बच्चे को उल्टी और दस्त शुरू हो जाते हैं।
यदि बीमारी गंभीर रुप ले ले तो पसलियां भी चलने लगती हैं। तेज बुखार हो जाता है। ऐसी स्थिति में यदि तत्काल बच्चे को बेहतर उपचार न मिले तो संक्रमण फेफड़े तक पहुंच जाता है। यह स्थिति गंभीर होती है। इससे शरीर को पूरी मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है और खून में ऑक्सीजन की कमी से शरीर नीला पड़ने लगता है। ऐसी स्थिति में बच्चे को तत्काल ऑक्सीजन देने की आवश्यकता होती है।
इसके अलावा जुकाम, खांसी और बुखार की दवाओं के अलावा बीमारी को रोकने के लिए एंटीबायोटिक की आवश्यकता होती है। इस मौसम में कोहरे के कारण बड़े लोगों में भी सांस की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में सांस के मरीजों को भी सावधान रहने की आवश्यकता होती है। यदि किसी को सांस लेने में दिक्कत हो तो तुरंत जिला अस्पताल या प्रशिक्षित डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।