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भगवान नरसिंह की तीसरी जलेब
– फोटो : अमर उजाला
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अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव के चौथे दिन शुक्रवार को राजसी ठाठ-बाट के साथ नरसिंह भगवान की तीसरी जलेब निकली। जलेब में सैंज घाटी के पांच देवी-देवताओं और देवलुओं ने हिस्सा लिया। वाद्ययंत्रों की थाप पर देवता खूब झूमे। ढोल-नगाड़ों की थाप पर निकली जलेब के माध्यम से नरसिंह भगवान ने ढालपुर में रक्षा सूत्र बांधा। भगवान नरसिंह की तीसरी जलेब का सिलसिला राजा की चानणी के पास से शाम करीब 4:00 बजे शुरू हुआ।
जलेब में माता आशापुरी, शतरूपा, मनु ऋषि, लक्ष्मी नारायण रैला, रिंगू नाग के देवरथ दाएं और बाएं तरफ चले, जबकि बीच में पालकी में सवार होकर भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार चले। मुख्य छड़ीबरदार भगवान नरसिंह की तलवार और ढाल को पकड़ते हैं। इन्हें नरसिंह भगवान का प्रतीक माना जाता है। जलेब के माध्यम से ढालपुर में एक परिक्रमा की गई। भव्य जलेब दशहरा उत्सव में सबके आकर्षण का केंद्र रही। ग्रामीण क्षेत्र से आए हुए लोगों और विदेशी मेहमानों ने जलेब का लुत्फ उठाया।
गौर रहे कि दशहरा उत्सव शुरू होने के दूसरे दिन से जलेब का सिलसिला शुरू होता है। लंका दहन के दिन सभी देवी-देवता अपने देवालयों की ओर रवाना हो जाएंगे। जलेब से पहले राजा की चानणी के पास देवलुओं ने शानदार कुल्लवी नाटी भी डाली। वाद्ययंत्रों की थाप पर देवलू थिरके। शनिवार को भगवान नरसिंह की निकलने वाली चौथी जलेब में आनी क्षेत्र के देवी-देवता अपने देवलुओं के साथ शामिल होंगे।
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