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Omar Abdullah
– फोटो : ANI
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जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेकां उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा, यह शर्म की बात है कि चुनाव आयोग के बजाय सुप्रीम कोर्ट को जम्मू-कश्मीर में चुनाव के बारे में निर्देश जारी करना पड़ा था। सितंबर 2024 के अंत तक विधानसभा चुनाव के निर्देश हैं। भाजपा और केंद्र सरकार बताए कि अदालत द्वारा तय समय सीमा के बारे में क्या करने जा रही है?
नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता ने शनिवार को यहां एक कार्यक्रम में कहा कि यह विचार सही नहीं है कि अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर की सभी समस्याओं की जड़ है। अब आतंकवाद मुक्त रहे जम्मू, राजोरी और पुंछ में भी आतंकवादी हमले हो रहे हैं। मौजूदा सरकार के कार्यकाल में घाटी में लक्षित हमलों में पहले की तुलना में अधिक कश्मीरी पंडित मारे गए हैं।
घाटी में कश्मीरी पंडितों पर आतंकी हमले नियमित घटना है। मुश्किल से एक या दो सप्ताह ऐसे गुजरते हैं जब कोई आतंकवादी हमला नहीं होता है। वहीं, अनुच्छेद 370 निरस्त होने के बावजूद अलगाववादियों को समर्थन जारी है।
नेकां उपाध्यक्ष का आरोप-कश्मीरी पंडितों को सुरक्षा की भावना नहीं दे पाई वर्तमान सरकार
नेकां उपाध्यक्ष ने दावा किया कि जिन कश्मीरी पंडितों को उनकी सरकार ने सरकारी नौकरियों के साथ घाटी में फिर से बसाया था, वे अब जम्मू वापस जाने की अनुमति मांग रहे हैं। क्योंकि, वर्तमान सरकार उनको सुरक्षा की भावना नहीं दे पाई है। इसलिए पांच या दस साल पहले की तुलना में आज अधिक कश्मीरी पंडित कश्मीर छोड़ना चाहते हैं।
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