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केराकत क्षेत्र मे बरी तैयार करतीं समूह की महिलाएं।
– फोटो : अमर उजाला
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किसानों के सामने अपना उत्पाद तैयार करके उसका उचित मूल्य प्राप्त करने की सबसे बड़ी चुनौती होती है। लेकिन जनपद की संध्या ने भी ठान लिया कि वह अपने उत्पाद न केवल यहां बल्कि राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाएंगी। इसके लिए संध्या सिंह ने एफपीओ तैयार किया है। इनके प्रमुख उत्पाद देसी घी व अचार के दीवाने महानगर के लोग भी हैं। हर माह उत्पादों को अच्छा खासा आर्डर मिल रहा है। इन्होंने अपने घरेलू उत्पाद को राष्ट्रीय बाजार में पहुंचाने के लिए ऑनलाइन शापिंग माध्यम पर भी रजिस्ट्रेशन करा रखा है। जिले के केराकत सरौनी पूरबपट्टी निवासी संध्या सिंह पिछले 15 साल से समूह बनाकर किसानों के उत्पादों की बिक्री करती थी।
इनकी तरफ से बेहतर प्रयास को देखते हुए नाबार्ड की तरफ से 22 फरवरी 2016 में एफपीओ बनवाया गया। अपने दम पर इनके एफपीओ का सालाना टर्नओवर 72 लाख रुपये का है। इनके पति अंजनी कुमार सिंह बीएसएनएल में काम करते थे। फिलहाल अब नौकरी छोड़कर वह इनके एफपीओ हाथ बंटा रहे हैं। इनकी बिटिया इनके उत्पाद को ऑनलाइन बाजार में पहुंचाने में मदद कर रही है। फिलहाल इनके एफपीओ में समूहों के माध्यम से करीब एक हजार महिलाएं व पुरुष जुड़े हैंं। देसी घी, आंवला व आम के आचार, लाल भरा मिर्चा, हवन की लकड़ी (समीधा) के उत्पाद को मुंबई, अहमदाबाद, कानपुर, लखनऊ के लोग व व्यापारी लेकर जाते है। इसके अलावा भी इनका मुरब्बा, बीज, सब्जियां, शहद, दूध, गाय के वर्मी कंपोस्ट भी बेचती हैं। इसके साथ ही केराकत में गौशाला में 100 से अधिक गायों को रखी हैं। प्रदेश सरकार की तरफ से इनको पुरस्कृत भी किया जा चुका है। इस बाबत संध्या सिंह ने बताया कि इसमें किसानों के उत्पाद को बेहतर मंच प्रदान करने का प्रयास किया गया। इसके जरिए उद्देश्य है कि आधी आबादी को कैसे सक्रिय रखा जाए व रोजगार से जोड़ा जाए। संवाद
इस बाबत नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक लल्लन कुमार ने बताया कि संध्या सिंह एफपीओ के माध्यम से बेहतर प्रयास कर रही हैं। इन्होंने एक हजार महिलाओं व पुरुषों को जोड़कर रखा है। सालाना 72 लाख रुपये का टर्न ओवर है।
यह है एफपीओ :-
खेती-किसानी के क्षेत्र में उभरने वाली इस सफलता का श्रेय किसान उत्पादक संगठन (फर्म प्रोड्यूसर आर्गेनाइजेशन) को भी जाता है। यह किसानों के उत्पाद का उचित मूल्य दिलाने का प्रयास भी करती हैं। यह किसानों की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करती है। इसका गठन विभिन्न किसानों के समूहों को मिलाकर किया जाता है।
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