[ad_1]

बीड़ बिलिंग(फाइल)
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बीड़ बिलिंग से उड़ान भरने के बाद राह भटके पोलैंड के पैराग्लाइडर पायलट के शव को दस दिन बाद भारतीय सेना की मदद से ढूंढ निकाला गया है। यह पायलट धर्मशाला की ऊपरी पहाड़ियों में खबरोटू के पास एक खड़ी चट्टान में फंसा था। इसकी पहचान पोलैंड के 74 वर्षीय पायलट आंद्रेज विक्टर के तौर पर हुई है।
उपायुक्त डॉ. निपुण जिंदल बिलिंग ने बताया कि विक्टर के पास पहुंचने में आ रही कठिनाई को देखते हुए जिला प्रशासन ने भारतीय वायुसेना के गरुड़ कमांडो और गुलमर्ग स्थित ‘हाई एल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल’ से संपर्क किया। वहां से आए भारतीय सेना और वायुसेना के पैराट्रूपर्स ने एक नवंबर को मोर्चा संभाला और वीरवार को पोलैंड के पायलट के शव को बाहर निकालकर जिला प्रशासन को सौंप दिया। शव को जोनल अस्पताल धर्मशाला में पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया जाएगा।
दरअसल पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन ने गायब हुए पायलट की सूचना जिला प्रशासन को 23 अक्तूबर को दी थी। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने बिलिंग पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन से समन्वय स्थापित कर निजी हेलिकाप्टर ने 24 अक्तूबर से पायलट को ढूंढना शुरू किया।
लोकेशन पता चलने के बाद अमेरिकी महिला पायलट को थमसर पास और एक रूसी पायलट को रेड रूफ टेंपल के पास से दो दिन के भीतर सुरक्षित रेस्क्यू किया गाया था। वहीं पोलैंड के पायलट आंद्रेज विक्टर की लोकेशन धर्मशाला की ऊपरी पहाड़ियों में खबरोटू के पास एक खड़ी चट्टान के पास समुद्र तल से करीब 3,650 मीटर ऊंचाई पर ट्रैक की गई।
डीसी ने बताया कि विक्टर ऊंचे पहाड़ों के बीच एकदम खड़ी चट्टान पर फंसे थे, जहां पहुंचना बहुत कठिन था। विक्टर को बाहर निकालने के लिए भारतीय सेना और वायुसेना से संपर्क साधा गया। वायुसेना ने रेस्क्यू के लिए अपने दो चीता हेलिकाप्टर मौके पर भेजे।
एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीम को पहाड़ी के ऊपर उतारा गया। उन्होंने बताया कि 26 अक्तूबर से यह टीमें उसी पहाड़ी पर मौजूद रहीं और पायलट को निकालने का प्रयास करती रहीं, लेकिन रास्ता न होने की वजह से वहां तक पहुंचने में असमर्थ रहीं।
[ad_2]
Source link