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पौष पूर्णिमा 25 जनवरी दिन गुरुवार को मनाई जाएगी. पौष पूर्णिमा पर स्नान, दान, जप और व्रत करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और मोक्ष मिलता है, इस दिन सूर्य देव की आराधना का विशेष महत्व है.

पौष पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 24 जनवरी की रात 09 बजकर 52 मिनट पर हो रही है. वहीं पौष पूर्णिमा तिथि की समाप्ति 25 जनवरी की रात 11 बजकर 26 मिनट पर होगी.

पौष पूर्णिमा पर पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है. 25 जनवरी को सूर्योदय के बाद से ही पूरे दिन पूजा-पाठ की जा सकती है. अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से 12 बजकर 55 मिनट तक है.प

पूजा विधि
पौष पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान से पहले व्रत का संकल्प लें.
पवित्र नदी या कुंड में स्नान करें और स्नान से पूर्व वरुण देव को प्रणाम करें.

स्नान के पश्चात सूर्य मंत्र का उच्चारण करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए.
स्नान से निवृत्त होकर भगवान मधुसूदन की पूजा करनी चाहिए और उन्हें नैवेद्य अर्पित करना चाहिए.

किसी जरुरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को भोजन कराकर दान-दक्षिणा देनी चाहिए.
दान में तिल, गुड़, कंबल और ऊनी वस्त्र विशेष रूप से देने चाहिए.
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