फर्जी पॉवर ऑफ अटॉर्नी मामला: 32 दिन बाद एसडीएम को हुआ था गलती का एहसास, आदेश पर लगाई थी रोक

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Fake power of attorney case: SDM realized the mistake after 32 days, put a stay on the order

यूनिटेक
– फोटो : social media

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फर्जी पॉवर ऑफ अटॉर्नी के जरिये बलिया के कमलदेव सिंह के पक्ष में यूनिटेक की अधिसूचित जमीन के सीमांकन का आदेश जारी करने के 32 दिन बाद किसानों की शिकायत के बाद एसडीएम राजातालाब शैलेंद्र कुमार मिश्र को अपनी गलती का एहसास हो गया था। इस बीच किसानों ने मंडलायुक्त और जिलाधिकारी से शिकायत कर दी थी।

कार्रवाई की भनक लगने पर एसडीएम ने अपने अधीनस्थों से जवाब तलब शुरू किया और 10 अक्तूबर को सीमांकन वाली जमीन पर किसानों की आपत्ति को स्वीकार करते हुए मेड़बंदी की कार्रवाई रोकने का आदेश भी जारी कर दिया था। जिलाधिकारी की ओर से इस प्रकरण पर मांगे गए स्पष्टीकरण में भी एसडीएम ने अपने 10 अक्तूबर के आदेश का हवाला देते हुए जवाब दिया था कि जल्द ही विधि संगत आदेश पारित कर दिया जाएगा।

राजातालाब तहसील के तत्कालीन उपजिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार मिश्र के फील्ड बुक पुष्ट करने के आदेश के एक महीने बाद आठ अक्तूबर 2023 को किसान सेवा संरक्षण समिति के अध्यक्ष दिनेश नारायण सिंह ने मंडलायुक्त कौशल राज शर्मा से इसकी शिकायत की। मंडलायुक्त ने जिलाधिकारी से पूरे प्रकरण की जांच कराने की सलाह दी। इस पर जिलाधिकारी ने एसडीएम ने पूरे प्रकरण की आख्या मांगी तो उन्होंने आनन-फानन में 10 अक्तूबर को दिनेश नारायण सिंह की ओर से आए तजबीजसानी (रेस्टोरेशन) आवेदन को स्वीकार करते हुए अपने आदेश पर रोक लगा दी थी।

10 अक्तूबर को ही राजस्व निरीक्षक को पत्र जारी कर मेड़बंदी की कार्रवाई रोकने के लिए कहा। इसी दिन जिलाधिकारी की ओर से मांगी गई आख्या में कहा कि शासन की ओर से धारा-24 के राजस्व वाद के त्वरित निस्तारण का हवाला दिया था। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व की रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने एसडीएम शैलेंद्र कुमार मिश्र को अपर उप जिलाधिकारी सदर पद पर तैनात किया। साथ ही इस प्रकरण में लिप्त कानूनगो महेंद्र सिंह, लेखपाल लक्ष्मण गिरी और पेशकार हेमंत कुमार संत को निलंबित कर दिया है।

 

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