बनारस में 3 ने की खुदकुशी: पत्नी से अनबन में पति, प्रेम प्रसंग में रेलवेकर्मी और घरेलू कलह में बुनकर ने दी जान

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मौत के बाद रखा शव

मौत के बाद रखा शव
– फोटो : सांकेतिक तस्वीर

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आज के इस भागमभाग भरी जिंदगी में धैर्य और संयम खोता जा रहा है। थोड़ा भी संकट आने या विषम परिस्थिति होने पर युवाओं द्वारा आत्मघाती कदम उठा लिया जा रहा है। दुर्भाग्य से गुरुवार को वाराणसी में ऐसे तीन मामले आए। जहां अलग-अलग थाना क्षेत्रों में तीन युवकों ने खुदकुशी कर ली। पत्नी से अनबन में पति और  प्रेम प्रसंग में रेलवे संविदा कर्मी ने फांसी लगा ली तो वहीं घरेलू कलह से तंग बुनकर ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी। तीनों ही युवकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। 

पत्नी से अनबन के बाद पति फंदे पर लटका
चोलापुर थाना क्षेत्र के गोपपुर में युवक ने गुरुवार शाम फंदे पर लटक जान दे दी। पत्नी से अनबन और घरेलू विवाद से तंग आकर युवक ने यह कदम उठाया। पुलिस ने शव को कब्जे में लिया। गोपपुर निवासी हरिराम प्रजापति (25) की शादी चार साल पूर्व रोहनिया निवासी गुड़िया से हुई थी।

शादी के कुछ माह बाद से ही पति और पत्नी के बीच अनबन होने लगी। इससे खफा पत्नी मायके चली गई। पत्नी की विदाई के लिए कई बार हरिराम और अन्य परिजनों ने प्रयास किया लेकिन पत्नी ससुराल आने को तैयार नहीं हुई। इस बीच हरिराम अवसाद में चला गया।

पुलिस की पूछताछ में परिजनों ने बताया कि अपराह्न के समय हरिराम अपने कमरे में आराम करने गया। अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। काफी देर तक बाहर नहीं आया तो परिजनों को शक हुआ। खिड़की से झांका तो हरिराम गाडर में लगी कुंडी में गमछे के सहारे लटका हुआ था। पुलिस के अनुसार तीन भाइयों में सबसे छोटा हरिराम टाइल्स और मार्बल का काम करता था। हरिराम की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। 

सिगरा थाना अंतर्गत छित्तूपुर में गुरुवार दोपहर युवक ने फंदे पर लटक जान दे दी। रेलवे में संविदा कर्मी के शव को सिगरा पुलिस ने कब्जे में लिया। पुलिस के अनुसार घरेलू कलह और प्रेम प्रसंग में युवक ने यह कदम उठाया। छित्तूपुर निवासी राधेश्याम भारद्वाज रेलवे में चालक हैं। दो बेटों में सबसे छोटा सतीश यादव (26) पीडीडीयू नगर रेलवे स्टेशन पर संविदा कर्मी था।

बुधवार रात वह पीडीडीयू नगर से घर आया। सुबह जल्दी उठा और फिर कमरे को अंदर से बंद कर लिया। सुबह 10 बजे के आसपास चचेरी बहन जब चाय देने के लिए दरवाजा खटखटाई तो कोई उत्तर नहीं मिला। काफी देर तक दरवाजा नहीं खुलने से परिजनों को शक हुआ। इसके बाद परिजनों ने दरवाजा तोड़ा, देखा कि पंखे की कुंडी में दुपट्टे के सहारे सतीश लटका हुआ था।

यह देखते ही परिजन चीखने-चिल्लाने लगे। सूचना पर सिगरा पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंच गई और शव को कब्जे में लिया। सतीश के बड़े भाई ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि गाजीपुर की रहने वाली युवती से सतीश का प्रेम प्रसंग चल रहा था। सिगरा इंस्पेक्टर राजू सिंह ने बताया कि घरेलू विवाद और प्रेम प्रसंग मामले में ही युवक ने यह कदम उठाया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया। 

लोहता थाना क्षेत्र के महमूदपुर गांव के सामने गुरुवार सुबह बुनकर ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी।  घरेलू कलह से तंग आकर बुनकर ने यह कदम उठाया। मौके पर पहुंची जीआरपी ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भिजवाया।  महमूदपुर निवासी रियाजुद्दीन अंसारी (34) बुनकरी का काम करता था। अल सुबह घर से निकला और गांव के सामने रेलवे ट्रैक के पास कुछ देर तक टहलता रहा।

इस बीच कैंट स्टेशन की ओर से आ रही प्रतापगढ़ पैसेंजर ट्रेन जैसे ही पास आई कि अचानक वह ट्रेन के सामने कूद गया। घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई। आसपास के लोगों ने तुरंत परिजनों को सूचना दी। सूचना पाकर पहुंची जीआरपी ने शव को कब्जे में लिया। पत्नी सवीना बानो और दो बच्चे बेसुध हो गए। पुलिस की पूछताछ में परिजनों ने बताया कि वह कुछ दिनों से अवसाद में था।

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आज के इस भागमभाग भरी जिंदगी में धैर्य और संयम खोता जा रहा है। थोड़ा भी संकट आने या विषम परिस्थिति होने पर युवाओं द्वारा आत्मघाती कदम उठा लिया जा रहा है। दुर्भाग्य से गुरुवार को वाराणसी में ऐसे तीन मामले आए। जहां अलग-अलग थाना क्षेत्रों में तीन युवकों ने खुदकुशी कर ली। पत्नी से अनबन में पति और  प्रेम प्रसंग में रेलवे संविदा कर्मी ने फांसी लगा ली तो वहीं घरेलू कलह से तंग बुनकर ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी। तीनों ही युवकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। 

पत्नी से अनबन के बाद पति फंदे पर लटका

चोलापुर थाना क्षेत्र के गोपपुर में युवक ने गुरुवार शाम फंदे पर लटक जान दे दी। पत्नी से अनबन और घरेलू विवाद से तंग आकर युवक ने यह कदम उठाया। पुलिस ने शव को कब्जे में लिया। गोपपुर निवासी हरिराम प्रजापति (25) की शादी चार साल पूर्व रोहनिया निवासी गुड़िया से हुई थी।

शादी के कुछ माह बाद से ही पति और पत्नी के बीच अनबन होने लगी। इससे खफा पत्नी मायके चली गई। पत्नी की विदाई के लिए कई बार हरिराम और अन्य परिजनों ने प्रयास किया लेकिन पत्नी ससुराल आने को तैयार नहीं हुई। इस बीच हरिराम अवसाद में चला गया।



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