Mohalla Clinic: भाजपा का आरोप, मोहल्ला क्लीनिक में नहीं हो रहे टेस्ट, डॉक्टरों को नहीं मिल रहा वेतन

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दिल्ली प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा, नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी

दिल्ली प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा, नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी
– फोटो : Amar Ujala

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दिल्ली प्रदेश भाजपा के नवनियुक्त अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने आरोप लगाया है कि राजधानी के मोहल्ला क्लीनिकों में टेस्ट नहीं किए जा रहे हैं और इनके लिए काम कर रहे डॉक्टरों को वेतन नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल बार-बार यह दावा करते हैं कि इन मोहल्ला क्लीनिकों पर लोगों को सैकड़ों टेस्ट मुफ्त किए जा रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि अनेक मोहल्ला क्लीनिक बंद पड़े हुए हैं। कई में आवारा पशु बैठे रहते हैं तो कई जगहों पर लोगों को दवा और इलाज भी नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोहल्ला क्लीनिक अरविंद केजरीवाल के झूठ का जीवंत प्रमाण हैं। सचदेवा ने यह दावा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की उस घोषणा के बाद किया, जिसमें मोहल्ला क्लीनिकों में 450 प्रकार के टेस्ट मुफ्त किए जाने की बात कही गई है।   

वीरेंद्र सचदेवा और नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने गुरुवार को आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी जिस मोहल्ला क्लीनिक को वर्ल्ड क्लास बताती है, उसका पूरा ढांचा चरमरा गया है। अगस्त के बाद से मोहल्ला क्लीनिकों के डॉक्टर्स और अन्य स्टाफ को वेतन नहीं दिया गया। पिछले दो महीनों से मोहल्ला क्लीनिकों में सभी टेस्ट बंद पड़े हैं और दवाइयों का नितांत अभाव है। दिल्ली के 520 में से 70 से ज्यादा मोहल्ला क्लीनिक बंद हो गए हैं और बाकी बंद होने के कगार पर हैं।

उन्होंने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने घोषणा की है कि अब मोहल्ला क्लीनिकों और दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में 450 टेस्ट निःशुल्क होंगे, जबकि सच्चाई यह है कि मोहल्ला क्लीनिकों में जो 212 टेस्ट पहले से मुफ्त होने की बात कही जाती है, वही दो महीने से बंद पड़े हैं। मोहल्ला क्लीनिकों से टेस्ट के लिए जिन लैब्स को अनुबंधित किया गया था, पिछले दो महीनों से उन लैब्स ने टेस्ट करने से मना कर दिया है। इसकी वजह यह है कि इन लैब्स का पिछला भुगतान ही नहीं किया गया।

भाजपा नेताओं ने कहा कि मोहल्ला क्लीनिकों में सफाई के लिए दो हजार रुपया महीना, वाई-फाई के बिल के लिए 700 रुपया महीना, पीने के पानी, स्टेशनरी और बाकी खर्चों के लिए एक हजार रुपया महीना डॉक्टर अपनी जेब से खर्च करते हैं। सरकार बाद में इनका भुगतान करती है। लेकिन सच्चाई यह है कि डॉक्टरों को वेतन तो मिल नहीं रहा, ऊपर से वे यह खर्चा भी कर रहे हैं और पिछले सात महीनों से उनके बिल अटके पड़े हैं।

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दिल्ली प्रदेश भाजपा के नवनियुक्त अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने आरोप लगाया है कि राजधानी के मोहल्ला क्लीनिकों में टेस्ट नहीं किए जा रहे हैं और इनके लिए काम कर रहे डॉक्टरों को वेतन नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल बार-बार यह दावा करते हैं कि इन मोहल्ला क्लीनिकों पर लोगों को सैकड़ों टेस्ट मुफ्त किए जा रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि अनेक मोहल्ला क्लीनिक बंद पड़े हुए हैं। कई में आवारा पशु बैठे रहते हैं तो कई जगहों पर लोगों को दवा और इलाज भी नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोहल्ला क्लीनिक अरविंद केजरीवाल के झूठ का जीवंत प्रमाण हैं। सचदेवा ने यह दावा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की उस घोषणा के बाद किया, जिसमें मोहल्ला क्लीनिकों में 450 प्रकार के टेस्ट मुफ्त किए जाने की बात कही गई है।   

वीरेंद्र सचदेवा और नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने गुरुवार को आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी जिस मोहल्ला क्लीनिक को वर्ल्ड क्लास बताती है, उसका पूरा ढांचा चरमरा गया है। अगस्त के बाद से मोहल्ला क्लीनिकों के डॉक्टर्स और अन्य स्टाफ को वेतन नहीं दिया गया। पिछले दो महीनों से मोहल्ला क्लीनिकों में सभी टेस्ट बंद पड़े हैं और दवाइयों का नितांत अभाव है। दिल्ली के 520 में से 70 से ज्यादा मोहल्ला क्लीनिक बंद हो गए हैं और बाकी बंद होने के कगार पर हैं।

उन्होंने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने घोषणा की है कि अब मोहल्ला क्लीनिकों और दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में 450 टेस्ट निःशुल्क होंगे, जबकि सच्चाई यह है कि मोहल्ला क्लीनिकों में जो 212 टेस्ट पहले से मुफ्त होने की बात कही जाती है, वही दो महीने से बंद पड़े हैं। मोहल्ला क्लीनिकों से टेस्ट के लिए जिन लैब्स को अनुबंधित किया गया था, पिछले दो महीनों से उन लैब्स ने टेस्ट करने से मना कर दिया है। इसकी वजह यह है कि इन लैब्स का पिछला भुगतान ही नहीं किया गया।

भाजपा नेताओं ने कहा कि मोहल्ला क्लीनिकों में सफाई के लिए दो हजार रुपया महीना, वाई-फाई के बिल के लिए 700 रुपया महीना, पीने के पानी, स्टेशनरी और बाकी खर्चों के लिए एक हजार रुपया महीना डॉक्टर अपनी जेब से खर्च करते हैं। सरकार बाद में इनका भुगतान करती है। लेकिन सच्चाई यह है कि डॉक्टरों को वेतन तो मिल नहीं रहा, ऊपर से वे यह खर्चा भी कर रहे हैं और पिछले सात महीनों से उनके बिल अटके पड़े हैं।



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