बालिका दिवस पर विशेष: काशी में बेटों के बराबर पहुंची बेटियां, बनाया रिकॉर्ड; हर दिन हासिल कर रहीं नया मुकाम

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International Girl Child Day 2024 HMIS portal data of daughters equal to sons in Varanasi

प्रतीकात्मक तस्वीर
– फोटो : Pixabay

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जमीन से लेकर आसमान तक हर जगह बेटियों का वर्चस्व है। शिक्षा, खेल, चिकित्सा, सेना, समाज सेवा से लेकर सरकारी कार्यालयों में कामकाज से लेकर समाज के हर क्षेत्र में बेटियां बेटों से बराबरी कर रही हैं। वह अपने प्रदर्शन से न केवल दिन प्रतिदिन नया मुकाम हासिल कर रही है बल्कि उस मिथक को भी तोड़ रही है, जिसमें लोग बेटियों को कम आंकने जैसी चर्चाएं करते हैं। काशी में अगर जन्मदर की बात करें तो इस साल बेटियां बेटों के बराबरी पर पहुंच गई हैं। यह अपने आप में एक रिकॉर्ड हैं।

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, कन्या भ्रूण हत्या रोकने के उद्देश्य से हर साल 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। सरकार की ओर से भी जननी सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, बालिका समृद्धि योजना, कन्या सुमंगला योजना, सुकन्या समृद्धि योजना सहित कई योजनाएं चलाई जा रही है। अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके, इसके लिए शहर से लेकर गांव तक अलग-अलग कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूक भी किया जा रहा है। 

निश्चित तौर पर लोगों का विश्वास इस ओर बढ़ रहा है। इसका प्रमाण स्वास्थ्य विभाग की ओर से हेल्थ मैनेजमेंट इनफार्मेशन सिस्टम (एचएमआईएस) के पोर्टल पर जिले में बालक-बालिका जन्म दर को लेकर दर्ज आंकड़ों में भी देखने को मिल रहा है। पिछले तीन सत्र के आंकड़ों पर गौर करे तो सत्र 2023-24 में में बेटा और बेटी बराबरी पर पहुंच गई है। इस सत्र(अप्रैल से मार्च 2024 तक) में अब तक नौ महीने में दिसंबर 2023 तक 29963 बेटों का जन्म हुआ जबकि इतनी ही संख्या बेटियों की भी हैं।

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