संवाद में सीओ साइबर सेल मोहसिन खान – फोटो : अमर उजाला
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तकनीकी का यह दौर और भागदौड़ भरी जिंदगी में ऑनलाइन कामकाज जितना सुखद है, उतना ही जोखिम भरा भी। जोखिम की वजह हैं साइबर हैकर। आलम ये है कि साइबर हैकर हर दिन नित-नए तरीके ईजाद कर मेहनत से कमाई गई रकम को ऐसे ठग ले जा रहे हैं, जिसका न शोर मचता है और न किसी को पता चलता है। कहने को जिले से लेकर प्रदेश स्तर तक पर पुलिस की साइबर टीमें लगातार इन पर शिकंजा कसने को प्रयासरत हैं। मगर जरूरत है जागरूक रहने की।
बृहस्पतिवार को यह बातें अमर उजाला संवाद के दौरान सीओ साइबर सेल मोहसिन खान ने कहीं। उन्होंने कुछ उदाहरण पेश करते हुए कहा कि साइबर शातिर गूगल से सर्वे, ई-मेल की जानकारी का डाटा हासिल कर लेते हैं। सरकारी विभागों से मिलती जुलती ई-मेल आईडी अथवा वेबसाइट बनाकर लोगों को लिंक भेजते हैं। सरकारी नौकरी के लिए आवेदन मांगते हैं। नौकरी की तलाश में लोग उस वेबसाइट पर संपर्क करते हैं तो उन्हें ई-मेल के जरिये लिंक भेजा जाता है। लिंक पर क्लिक करने वाले व्यक्ति के कंप्यूटर व मोबाइल फोन में वायरस चला जाता है। इसके बाद शातिर उसे हैक कर खातों में सेंध लगा देते हैं और रकम पार हो जाती है। हैकरों द्वारा लगातार ठगी के तरीके ईजाद किए जा रहे हैं।
कभी क्रेडिट कार्ड बनवाने के नाम पर, कभी केवाईसी के नाम पर, कभी ओएलएक्स पर बिक्री के नाम पर, कभी ईनाम निकलने के नाम पर, कभी बीमा पॉलिसी पर ईनाम के नाम पर ठगी होती है। इन दिनों साइबर हैकर लालची ऑफर देकर, ऑनलाइन न्यूड कॉलिंग कर ब्लैकमेल कर, सेवानिवृत्तों के पीएफ खाते में अपडेट के नाम पर ठगी कर रहे हैं।
बाहर जाते समय ऑनलाइन पोस्ट शेयर करने से बचें, ताकि किसी को आपके बाहर होने की खबर न लगे।
डार्क वेब के प्रति सजग रहें, बच्चे अगर ऑनलाइन पढ़ाई या गेम खेलते हैं तो उन पर निगरानी भी जरूरी है।
अपने बायोमैट्रिक डेटा और आधार को कभी किसी को न बताएं और उसे डिजिटली लॉक रखें, दो चरण का लॉक लगाएं।
वाइस ओवर इंटरनेंट प्रोटोकॉल वाइप के जरिये अपने अपने ऑनलाइन प्लेटफार्म पर हमें सुरक्षा प्रोटोकॉल रखें।
किसी सार्वजनिक पावर चार्जिंग स्टेशन पर कभी मोबाइल चार्ज न करें, वहां हमेशा हैकिंग का खतरा बना रहता है।
ये भी अहम तथ्य
डायनमिक आईपी सिस्टम:-अगर आप अपने मोबाइल इंटरनेट को प्रयोग करते हैं तो उसकी आईपी अल्प समय के लिए बनती है।
स्टेटिक आईपी सिस्टम:-आप अपने सिस्टम से इंटरनेट का प्रयोग करते हैं तो इसकी आईपी पूरे समय के लिए बनती है।
साइबर पुलिस द्वारा दोनों के स्तर से हुई साइबर ठगी को पकड़ने के लिए अलग अलग तकनीक का प्रयोग किया जाता है।
ये हैं साइबर अपराध, ऐसे बचें
फेसबुक क्लोनिंग: हर दिन अपने फेसबुक दोस्तों से जांचें कि कोई क्लोन तो नहीं
इंस्टाग्राम फिशिंग स्कैम: किसी भी कीमत पर फिशिंग संदेशों से कोई समझौता नहीं
ओएलएक्स फ्राड :किसी भी लालच में आकर एडवांस भुगतान किसी कीमत पर नहीं
ऑफर्स से सावधान: सोशल साइट या मोबाइल पर आने वाले ऑफर्स से बचें
ऑनलाइन लोन : कभी किसी भी मजबूरी में किसी ऑनलाइन लोन ऑफर से दूर रहें
मिस्ड कॉल : 92, 90, 09 या 344 से शुरू होने वाले कॉल से बचें, कॉल बैक भी नहीं करें
पासवर्ड-गोपनीयता : अपने सोशल एकाउंट व बैंक एकाउंट पर पासवर्ड बदलते रहें
बैंक की ओर से खाते को लेकर कभी कोई डिटेल नहीं मांगी जाती है, आप जानकारी न दें
एटीएम पिन का पासवर्ड, ओटीपी समेत अन्य जानकारी भी किसी से शेयर न करें
इंटरनेट पर किसी भी संदिग्ध लगने वाले लिंक को क्लिक न करें
ऑनलाइन बुकिंग के दौरान प्रचलित मोबाइल एप का ही प्रयोग करें
एटीएम केबिन में कार्ड प्रयोग करते समय सतर्क रहें और मदद न लें
एटीएम में स्कैनर लगाकर शातिर लोगों की डिटेल चुरा लेते हैं
मोबाइल पर किसी तरह की लाटरी व पुरस्कार के लालच में न पड़ें
ये होते तीन तरह के प्रमुख साइबर अपराध
व्यक्तिगत छवि पर चोट कर ठगी का अपराध:-साइबर हैकर कभी भी किसी की आईडी से उसका फोटो चोरी कर उसे मार्फ कर फिर उसे वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करते हुए ठगी करते हैं। अलीगढ़ में भी एक किशोरी छात्रा का फोटो इसी तरह वायरल करने की धमकी देकर ठगी की गई।
किसी व्यक्ति को डराकर ठगी का अपराध:-साइबर हैकर कभी भी किसी को कॉल पर उसे किसी अपराध के लिए डराते हैं और फिर उसे उससे बचाने की एवज में ठगी करते हैं। उदाहरण के तौर पर अलीगढ़ के एक व्यापारी के नोएडा के प्लाट पर बिजली का बकाया बिल होने के नाम पर कॉल आया। फिर मीटर उखाड़ने की धमकी देकर ऑनलाइन भुगतान का रास्ता बताकर बचाने का ऑफर किया। इसी दौरान ऑनलाइन ठगी कर ली।
सरकारी साइटों में घुसपैंठ कर ठगी का अपराध:-हैकर किसी सरकारी साइट में घुसकर या उसकी मिलती जुलती साइट बनाकर लोगों के साथ ठगी करते हैं। ताजा मामला हाल में एम्स की साइट को हैक कर ठगी का है। इसी तरह सरकारी योजनाओं से जुड़ी साइट बनाकर कई बार ठगी के मामले सामने आए हैं।
ये भी ठगी के कुछ तरीके ऑनलाइन शादी के नाम पर ठगी, ऑनलाइन बिल जमा करने के नाम पर ठगी, ऑनलाइन गेम के नाम पर ठगी, ऑनलाइन फार्म भरने के नाम पर ठगी, ऑनलाइन ऑफर/लालच देकर ठगी, ऑनलाइन ऋण देने के नाम पर ठगी आदि के अनगिनत तरीके।
साइबर क्राइम में डार्क वेब प्लेटफार्म पर संगठित अपराध शुरू हो गया है। जिसमें देश विरोधी गतिविधियों से लेकर, तस्करी, मानव तस्करी, अपराध, हत्या, ब्लैकमेलिंग, ठगी, देहव्यापार तक के अपराध हो रहे हैं।
साल दर साल बढ़ा साइबर अपराध
2018 में 192 शिकायत आईं।
2019 में 254 शिकायत आईं।
2020 में 322 शिकायत आईं।
2021 में 400 शिकायत आईं।
2022 में साइबर ठगी के आंकड़े
2500 शिकायतें इस साल आनलाइन दर्ज हुई हैं
500 शिकायतों को ऑफलाइन करवाया गया दर्ज
400 आफलाइन शिकायतों का हो चुका है निस्तारण
41 मुकदमे अब तक रेंज स्तरीय साइबर थाने में दर्ज
15 मुकदमों का पुलिस कर चुकी है पर्दाफाश
साइबर सेल लगातार ठगी के रुपये वापसी पर कर रही काम:एसएसपी एसएसपी कलानिधि नैथानी बताते हैं कि साइबर टीम लगातार ऑनलाइन हैकिंग पर काम कर रही है। इसी का परिणाम है कि लोगों के रुपये तक वापस कराए जा रहे हैं। मगर इसमें जरूरत है निर्धारित समय में पुलिस के पास आने की। दूसरा सावधानी की। इस अपराध से सिर्फ सावधानी और गोपनीयता से बचा जा सकता है। जरा से लालच में लापरवाही बरतने और खाते की जानकारियां शेयर करने पर आपको ठगी का शिकार होने से कोई नहीं बचा जा सकता। हां, साइबर ठगी में रुपये ट्रांसफर होने के मामले में जरूरी है कि सबसे पहले पुलिस से शिकायत करें। अगर 24 घंटे के अंदर शिकायत पहुंचेगी तो रुपये वापसी में आसानी रहती है। इसके लिए गृह मंत्रालय से भी राष्ट्रीय स्तर पर एक पोर्टल बनाया गया है, जिसमें सभी बैंक एक प्लेटफार्म पर हैं और शिकायत रुपये वापसी में मदद मिलती है।
विस्तार
तकनीकी का यह दौर और भागदौड़ भरी जिंदगी में ऑनलाइन कामकाज जितना सुखद है, उतना ही जोखिम भरा भी। जोखिम की वजह हैं साइबर हैकर। आलम ये है कि साइबर हैकर हर दिन नित-नए तरीके ईजाद कर मेहनत से कमाई गई रकम को ऐसे ठग ले जा रहे हैं, जिसका न शोर मचता है और न किसी को पता चलता है। कहने को जिले से लेकर प्रदेश स्तर तक पर पुलिस की साइबर टीमें लगातार इन पर शिकंजा कसने को प्रयासरत हैं। मगर जरूरत है जागरूक रहने की।
बृहस्पतिवार को यह बातें अमर उजाला संवाद के दौरान सीओ साइबर सेल मोहसिन खान ने कहीं। उन्होंने कुछ उदाहरण पेश करते हुए कहा कि साइबर शातिर गूगल से सर्वे, ई-मेल की जानकारी का डाटा हासिल कर लेते हैं। सरकारी विभागों से मिलती जुलती ई-मेल आईडी अथवा वेबसाइट बनाकर लोगों को लिंक भेजते हैं। सरकारी नौकरी के लिए आवेदन मांगते हैं। नौकरी की तलाश में लोग उस वेबसाइट पर संपर्क करते हैं तो उन्हें ई-मेल के जरिये लिंक भेजा जाता है। लिंक पर क्लिक करने वाले व्यक्ति के कंप्यूटर व मोबाइल फोन में वायरस चला जाता है। इसके बाद शातिर उसे हैक कर खातों में सेंध लगा देते हैं और रकम पार हो जाती है। हैकरों द्वारा लगातार ठगी के तरीके ईजाद किए जा रहे हैं।
कभी क्रेडिट कार्ड बनवाने के नाम पर, कभी केवाईसी के नाम पर, कभी ओएलएक्स पर बिक्री के नाम पर, कभी ईनाम निकलने के नाम पर, कभी बीमा पॉलिसी पर ईनाम के नाम पर ठगी होती है। इन दिनों साइबर हैकर लालची ऑफर देकर, ऑनलाइन न्यूड कॉलिंग कर ब्लैकमेल कर, सेवानिवृत्तों के पीएफ खाते में अपडेट के नाम पर ठगी कर रहे हैं।