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अव्यवस्थित परिवहन, बैक्टीरिया से सने हाथों से छूने, तापमान के उतार-चढ़ाव समेत अन्य कारणों से मुर्गी के अंडे खराब हो जाते हैं। जल्द ही इस चिंता से निजात मिलने की उम्मीद है। सीएआरआई ने इस दिशा में शोध शुरू किया है। इसके सकारात्मक परिणाम मिले हैं।
बरेली में केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई) इज्जतनगर के निदेशक डॉ. एके तिवारी के मुताबिक अंडे रखने की जगह और छूने के दौरान स्वच्छता का ध्यान नहीं रखा जाता। इससे अंडे बैक्टीरिया के संपर्क में आ जाते हैं। सर्दियों में न्यूनतम तापमान दो से तीन डिग्री और गर्मियों में 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच जाता है। बरसात में नमी का स्तर सौ फीसदी तो गर्मियों में 40 फीसदी से भी कम होता है।
ऐसी परिस्थितियों में अंडों को सुरक्षित रखने के लिए स्प्रे तैयार किया जा रहा है। इससे अंडों की प्रकृति प्रभावित नहीं होगी, साथ ही उसके भीतर क्रियाओं की गति भी धीमी रहेगी। शुरुआती चरण में अंडों को 30 दिन तक सुरक्षित रखने में सफलता मिल गई है। समयावधि और बढ़ाने के लिए प्रयास चल रहे हैं।
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