स्वर्वेद महामंदिर: 25 हजार कुंडीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ का हुआ समापन, देश-विदेश के भक्तों ने लिया हिस्सा

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Swarved Mahamandir Dham 25 thousand Kundiya Swarved Gyan Mahayagya Grand ending

स्वर्वेद महामंदिर धाम में महायज्ञ का समापन।
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


स्वर्वेद महामंदिर धाम उमरहां के प्रांगण में विहंगम योग संत समाज के 100वें वार्षिकोत्सव पर आयोजित 25 हजार कुंडीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ का समापन मंगलवार को हुआ। इस महायज्ञ में देश-विदेश से आए लाखों भक्त-शिष्यों ने यज्ञ-कुण्ड में आहुतियां दीं। 

महायज्ञ के समापन अवसर पर देश- विदेश से आए लाखों भक्तों को संबोधित करते हुए सद्गुरु आचार्य स्वतंत्र देव महाराज ने कहा कि आत्मोद्धार का सर्वश्रेष्ठ साधन है भक्ति, लेकिन आज की भक्ति अज्ञान एवं आडंबरयुक्त जड़भक्ति है। जड़भक्ति से ऊपर उठकर भक्ति के चेतन पथ पर अग्रसर होने की आवश्यकता है। अधिकांश व्यक्तियों का जीवन अविद्या एवं अंधकार में व्यतीत हो रहा है। विहंगम योग ही विशुद्ध चेतन भक्ति है, जिसमें साधक संपूर्ण विकारों को त्यागकर आतंरिक शुद्ध स्वरूप की प्राप्ति कर लेता है। 

उन्होंने कहा कि जैसे कमल का पत्ता जल से ही उत्पन्न होता है और जल में ही रहता है पर वह जल से लिप्त नहीं होता। ऐसे ही एक विहंगम योगी संसार में रहते हुए संसार के कार्यों को करते हुए भी इससे निर्लिप्त रहता है। 

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