समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेताओं में शुमार किए जाने वाले आजम खां की कभी उत्तर प्रदेश में तूती बोलती थी। वक्त बदला तो आजम खान का सियासी सफर ढलान पर आ गया। 10 मई को एक बार फिर से आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम की खाली हुई विधानसभा सीट स्वार पर उपचुनाव होने जा रहा है। सियासी गलियारों में चर्चा इसी बात की है कि आजम खान की खत्म हो रही विरासत को क्या समाजवादी पार्टी के झंडे तले उनके घर का कोई सदस्य आगे बढ़ाएगा या फिर बाहर से ही कोई प्रत्याशी सपा से चुनाव लड़ेगा।
समाजवादी पार्टी के नेता आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम न वोट देने के हकदार बचे और न ही विधानसभा चुनाव लड़ने के हकदार हैं। आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम विधानसभा सदस्यता जाने के बाद स्वार विधानसभा में 10 मई को उपचुनाव होना है। क्योंकि आजम खान से लेकर उनके बेटे चुनाव लड़ने के हकदार नहीं है। ऐसे में अब रामपुर में आजम खा को अपनी सियासत की विरासत को बचाने का बड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि स्वार में होने वाला विधानसभा का चुनाव आजम खान के लिए इसलिए भी बड़ा चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि उनके घर से कोई भी मजबूत प्रत्याशी विधानसभा के चुनाव में किस्मत आजमाने के लिए नजर नहीं आ रहा है।
सियासी जानकारों का कहना है कि अगर स्वार विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी की ओर से आजम के परिवार की बजाय कोई बाहर का प्रत्याशी लड़ता है, तो देखना यही होगा कि क्या आजम खां अपना सियासी रसूख बचा पाएंगे। दरअसल रामपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भी वर्षों से चला आ रहा आजम खां का दबदबा खत्म हो गया और भाजपा ने वहां पर विजय हासिल की। उसके बाद आजम खां के बेटे अब्दुल्ला आजम की भी सदस्यता चली गई। अब्दुल्ला आजम की सदस्यता जाने के बाद अब रामपुर की स्वार विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने वाला है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि स्वार विधानसभा का यह चुनाव आजम खान के लिए प्रतिष्ठा का चुनाव माना जा रहा है। बड़ा सवाल यही है कि आजम खान की सियासी प्रतिष्ठा बचाने के लिए उनके घर परिवार से कोई चुनाव लड़ेगा या नहीं। जानकारों का कहना है इस बार स्वार विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर आजम के परिवार से नहीं बल्कि बाहर से कोई प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतरेगा।
किसके खाते में जाएगी यह सीट- अपना दल या भाजपा
हालांकि स्वार विधानसभा सीट पर सिर्फ समाजवादी पार्टी ही नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के लिए भी प्रत्याशी को मैदान में उतारना मशक्कत भरा माना जा रहा है। पिछले चुनाव में यह सीट भारतीय जनता पार्टी के सहयोगी अपना दल को मिली थी और अपना दल यहां से सीट निकालने में कामयाब नहीं हुई थी। क्योंकि अब लड़ाई रामपुर में सियासी वर्चस्व की है, इसलिए चर्चा यह भी हो रही है कि स्वार से क्या यह सीट दोबारा अपना दल के हिस्से में जाएगी या भारतीय जनता पार्टी यहां पर अपना प्रत्याशी मैदान में उतारेगी।
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राजनीतिक विश्लेषक जटाशंकर सिंह कहते हैं कि निश्चित तौर पर आजम खान के लिए अपनी सियासत को बचाने के लिए स्वार विधानसभा सीट में अपनी ताकत तो लगानी पड़ेगी। उनका कहना है कि अब आजम खान इस चुनाव में किस तरीके से अपनी सियासत को आगे बढ़ाने के लिए दांव चलते हैं यह तो अगले कुछ दिनों में ही स्पष्ट होगा। सूत्रों के मुताबिक विधानसभा सीट पर प्रत्याशी कौन होगा, इसे लेकर समाजवादी पार्टी और आजम खान की ओर से सब कुछ तय कर लिया गया है।