यूपी: दोगुनी रफ्तार से बढ़े हैं शराब पीने वाले, आबकारी से आमदनी 17 हजार करोड़ से बढ़कर हुई 36 हजार करोड़

[ad_1]

विस्तार


 प्रदेश में पिछले पांच साल में व्यापार तेजी से बढ़ा है इसीलिए व्यापार से आने वाला जीएसटी भी दोगुना हो गया है। शराब की खपत में भी जबर्दस्त वृद्धि हुई है। इसी का नतीजा है कि शराब से मिलने वाला आबकारी शुल्क दोगुना हो गया है। प्रापर्टी खरीदने वाले भी बढ़े हैं लेकिन आबकारी की तुलना में स्टांप ड्यूटी मिलने वाला राजस्व काफी कम है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट से प्रदेश के कारोबारी ट्रेंड की ये झलक देखने को मिली है।

वित्त विभाग पर सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पांच साल में भू राजस्व और विद्युत शुल्क से मिलने वाले राजस्व में उल्लेखनीय गिरावट है। दूसरी ओर एसजीएसटी, आबकारी, वाहन कर और स्टांप से मिलने वाले राजस्व का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है। वर्ष 2017-18 में प्रदेश को उपरोक्त मदों से लगभग 97 हजार करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। वर्ष 2021-22 में ये बढ़कर 1.47 लाख करोड़ हो गया। यानी पांच साल में राजस्व में करीब 50 हजार करोड़ रुपये की वृद्धि हुई। इसमें सबसे बड़ा योगदान राज्य कर, आबकारी और स्टांप शुल्क का है।

रिपोर्ट के मुताबिक आबकारी शुल्क में वृद्धि का सबसे बड़ा कारक देशी शराब की खपत में वृद्धि रही। कमाई के मामले में दूसरे नंबर पर विदेशी शराब और तीसरे नंबर पर बीयर का नंबर है। वहीं यात्री कर, मनोरंजन कर, होटल से मिलने वाले कर, सट्टेबाजी पर कर और सिनेमाघरों में दिखाए जाने वाले विज्ञाापनों पर कर में बहुत तेज गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2017-18 में इन मदों में 324 करोड़ रुपये का राजस्व प्रदेश सरकार को मिला था जो 2021-22 में घटकर महज 13 करोड़ रुपये रह गया। सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक इतनी तेज गिरावट की वजह तमाम करों का जीएसटी में विलय होना है।

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *