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एएमयू के छात्र प्रदर्शन करते हुए
– फोटो : अमर उजाला
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एएमयू के सर सैयद हाउस के मैदान पर रविवार की सुबह टहलने आए यूनिसेफ के सेवानिवृत्त डॉक्टर सफदर अली पर आवारा कुत्तों ने हमला कर दिया, जिसमें उनकी मौत हो गई। इसके विरोध में छात्र-छात्राओं ने बाब-ए-सैयद बंद कर प्रदर्शन किया। छात्रों ने तत्काल आवारा कुत्तों पर काबू करने की मांग उठाई। उन्हें पकड़ने और वहां से ले जाने को लेकर नारे लगाए। इसके लिए जिम्मेदार रेजिडेंशियल कोचिंग एकेडमी (आरसीए) के निदेशक के खिलाफ नारे लगा कर उन्हें हटाने की मांग की गई।

दोपहर करीब दो बजे एएमयू और आरसीए के छात्र-छात्राएं बाब-ए-सैयद पर पहुंचे और उसे बंद कर दिया। छात्रों ने एएमयू प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। बाब-ए-सैयद बंद होने की जानकारी होने पर प्रॉक्टर और उनकी टीम पहुंच गई। प्रॉक्टोरियल टीम ने छात्र -छात्राओं को समझाने का प्रयास किया, तो छात्रों से तीखी नोकझोंक हुई। छात्र अपनी मांगों को लेकर अड़े रहे। छात्र-छात्राओं ने कहा कि आरसीए के निदेशक से बीते 10 दिन में कई बार नगर निगम द्वारा आवारा कुत्तों को पकड़वाने की अपील की गई, लेकिन शिकायत पर एएमयू प्रशासन और आरसीए के निदेशक ने कोई गौर नहीं किया।

एएमयू प्रशासन और आरसीए के निदेशक की लापरवाही से एक सेवानिवृत्त डॉक्टर की मौत हो गई। अगर आसपास सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे होते तो घटना के बारे में सही जानकारी नहीं हो सकती थी। घटना के 3 घंटे बाद एक बार फिर आवारा कुत्तों के झुंड ने एक छात्र को दौड़ा लिया। दोपहर करीब साढ़े तीन बजे नगर निगम के कर्मचारी आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए आए। तब कहीं जाकर मामला शांत हुआ। छात्र-छात्राओं ने मृतक के परिजनों को आर्थिक सहायता देने और आरसीए के निदेशक को निलंबित करने के साथ आरसीए कमेटी भंग करने की मांग की। बमुश्किल प्रॉक्टोरियल टीम ने छात्रों को समझा कर बाब ए सैयद को खुलवाया।
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