Aligarh News: प्रशासन को बनना होगा भगीरथ, 10 में से 4 नदियां बचीं, बाकी हुईं विलुप्त

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नदी प्रतीकात्मक

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– फोटो : amar ujala

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वैसे, जितनी नदियां अलीगढ़ जिले में हैं, शायद ही उतनी नदियां किसी भी जिले में हों। अलीगढ़ जिले में सरकारी रिकॉर्ड में 10 नदियों का अस्तित्व है। कुछ का दायरा सिमट गया है। कुछ अतिक्रमण की भेंट चढ़ गई हैं। कुछ सरकारी मशीनरी की उदासीनता के चलते विलुप्त हो चुकी हैं। 

नदियों पर अतिक्रमण की गिद्ध दृष्टि की वजह से पर्यावरण पर भी असर पड़ा है। फिलहाल, गंगा, यमुना, काली, नीम नदी वजूद में हैं, जबकि बाकी नदियां विलुप्त हो चुकी हैं। जिला प्रशासन ने इन नदियों को पुराने अस्तित्व में लाने के लिए कवायद शुरू कर दी है। अगर यह कार्ययोजना सफल रही, तो जिले के पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए यह एक भगीरथ प्रयास होगा।
  
नदियों के विलुप्त होने से बना डॉर्क जोन 
खुर्जा से निकलकर करबन नदी अलीगढ़ के कई इलाकों को छूते यमुना में पहुंचती थी, जो अब सूख चुकी है। इसकी लंबाई जिले में 70 किलोमीटर है। नदी के बहने से जलस्तर बेहतर था, लेकिन अब नदी के आसपास के क्षेत्र डॉर्क जोन में हैं। जलस्तर के मामले में खैर, लोधा, चंडौस, गंगीरी, जवां सिकंदरपुर में खतरनाक मुहाने पर हैं, जबकि इगलास इलाका खतरे में है।

नीम नदी बुलंदशहर से होकर आती है। जिले में अतरौली तहसील के मलहपुर गांव से अलीगढ़ में यह प्रवेश करती है। कनकपुर, पनेहरा, नगला बंजारा, खड़ौआ, आलमपुर, जिरौली होते हुए यह कासगंज जिला (पहले एटा) में प्रवेश करती है। अलीगढ़ में नदी की लंबाई करीब 40 किमी थी। चौड़ाई भी 50 से 100 मीटर तक थी, लेकिन समय के साथ लोग इस पर कब्जे करते चले गए। 

20 साल पहले नीम नदी के प्रवाह से दो दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को फायदा होता था। नदी के किनारे बसे गांव कनकपुर, पनेहरा आदि के लोग नदी में स्नान करते थे। पशु-पक्षी की पानी पीने की व्यवस्था थी, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है।

एएमयू के उर्दू एकेडमी के पूर्व निदेशक डॉ. राहत अबरार ने बताया कि सर सैयद अहमद खान ने एएमयू की स्थापना के लिए अलीगढ़ को इसलिए चुना था कि यहां कभी बाढ़ नहीं आ सकती है और न ही कभी सूखा पड़ सकता है, क्योंकि गंगा और यमुना नदी होने के चलते कभी सूखा नहीं पड़ सकता है और जलस्तर ठीक होने के चलते कभी अकाल नहीं पड़ेगा। यही सोच के चलते सर सैयद ने अलीगढ़ का यूनिवर्सिटी की स्थापना के लिए चुनाव किया था।

जिले की नदियां

  1. गंगा नदी
  2. यमुना नदी 
  3. करबन नदी 
  4. सेंगर नदी
  5. छोइया नदी
  6. नीम नदी 
  7. रुतबा नदी
  8. सिरसा नदी
  9. काली नदी
  10. रद नदी

नदी अब नदी नहीं रह गई। अब वह गंदा तालाब हो गई है। अलीगढ़ के नालों का गंदा पानी में नदी में पानी जा रहा है। कई नदियां विलुप्त हो चुकी हैं। प्रशासन को हस्तक्षेप करना होगा। -सुबोधनंदन शर्मा, पर्यावरणविद् 
जिले की विलुप्त हो चुकी छह नदियों को पुराने दौर में लौटाने के लिए काम शुरू हो गया है। मनरेगा के तहत उनका जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। यह नदियां पर्यावरण को बेहतर बनाएंगी।  -अंकित खंडेलवाल, मुख्य विकास अधिकारी

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वैसे, जितनी नदियां अलीगढ़ जिले में हैं, शायद ही उतनी नदियां किसी भी जिले में हों। अलीगढ़ जिले में सरकारी रिकॉर्ड में 10 नदियों का अस्तित्व है। कुछ का दायरा सिमट गया है। कुछ अतिक्रमण की भेंट चढ़ गई हैं। कुछ सरकारी मशीनरी की उदासीनता के चलते विलुप्त हो चुकी हैं। 

नदियों पर अतिक्रमण की गिद्ध दृष्टि की वजह से पर्यावरण पर भी असर पड़ा है। फिलहाल, गंगा, यमुना, काली, नीम नदी वजूद में हैं, जबकि बाकी नदियां विलुप्त हो चुकी हैं। जिला प्रशासन ने इन नदियों को पुराने अस्तित्व में लाने के लिए कवायद शुरू कर दी है। अगर यह कार्ययोजना सफल रही, तो जिले के पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए यह एक भगीरथ प्रयास होगा।

  

नदियों के विलुप्त होने से बना डॉर्क जोन 

खुर्जा से निकलकर करबन नदी अलीगढ़ के कई इलाकों को छूते यमुना में पहुंचती थी, जो अब सूख चुकी है। इसकी लंबाई जिले में 70 किलोमीटर है। नदी के बहने से जलस्तर बेहतर था, लेकिन अब नदी के आसपास के क्षेत्र डॉर्क जोन में हैं। जलस्तर के मामले में खैर, लोधा, चंडौस, गंगीरी, जवां सिकंदरपुर में खतरनाक मुहाने पर हैं, जबकि इगलास इलाका खतरे में है।

नीम नदी बुलंदशहर से होकर आती है। जिले में अतरौली तहसील के मलहपुर गांव से अलीगढ़ में यह प्रवेश करती है। कनकपुर, पनेहरा, नगला बंजारा, खड़ौआ, आलमपुर, जिरौली होते हुए यह कासगंज जिला (पहले एटा) में प्रवेश करती है। अलीगढ़ में नदी की लंबाई करीब 40 किमी थी। चौड़ाई भी 50 से 100 मीटर तक थी, लेकिन समय के साथ लोग इस पर कब्जे करते चले गए। 

20 साल पहले नीम नदी के प्रवाह से दो दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को फायदा होता था। नदी के किनारे बसे गांव कनकपुर, पनेहरा आदि के लोग नदी में स्नान करते थे। पशु-पक्षी की पानी पीने की व्यवस्था थी, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है।



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