Amalaki Ekadashi 2023: कल रखा जाएगा आमलकी एकादशी का व्रत, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

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Amalaki Ekadashi 2023:  आमलकी एकादशी कल यानी 3 मार्च 2023 को है. फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि आमलकी एकादशी या आंवला एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु और आंवले के पेड़ की पूजा करते हैं. आइए जानते हैं शुभ मुहूर्त और पूजा विधि …

आमलकी एकादशी शुभ मुहूर्त

होली से पहले आने वाल एकादशी को रंगभरी एकादशी और आमलकी एकादशी कहते हैं. इस साल फाल्गुन शुक्ल पक्ष की आमलकी एकादशी 3 मार्च 2023 को है और व्रत का पारण 4 मार्च 2023 को सुबह 06.48 से सुबह 09.09 तक किया जाएगा. ये तिथि श्रीहरि को बेहद प्रिय है.

आंवला एकादशी पूजा की विधि

आमलकी एकादशी  के दिन सबसे पहले स्नान करके भगवान विष्णु की प्रतिमा के समक्ष हाथ में तिल, कुश, मुद्रा और जल लेकर संकल्प करें कि मैं भगवान विष्णु की प्रसन्नता एवं मोक्ष की कामना से आमलकी एकादशी का व्रत रखता हूं. मेरा यह व्रत सफलता पूर्वक पूरा हो इसके लिए श्री हरि मुझे अपनी शरण में रखें. संकल्प के पश्चात षोड्षोपचार सहित भगवान की पूजा करें.

भगवान की पूजा के पश्चात पूजन सामग्री लेकर आंवले के वृक्ष की पूजा करें. सबसे पहले वृक्ष के चारों की भूमि को साफ करें और उसे गाय के गोबर से पवित्र करें. पेड़ की जड़ में एक वेदी बनाकर उस पर कलश स्थापित करें. इस कलश में देवताओं, तीर्थों एवं सागर को आमत्रित करें. कलश में सुगन्धी और पंच रत्न रखें. इसके ऊपर पंच पल्लव रखें फिर दीप जलाकर रखें. कलश के कण्ठ में श्रीखंड चंदन का लेप करें और वस्त्र पहनाएं. अंत में कलश के ऊपर श्री विष्णु के छठे अवतार परशुराम की स्वर्ण मूर्ति स्थापित करें और विधिवत रूप से परशुराम जी की पूजा करें. रात्रि में भगवत कथा व भजन कीर्तन करते हुए प्रभु का स्मरण करें.

द्वादशी के दिन प्रातरू ब्राह्मण को भोजन करवाकर दक्षिणा दें साथ ही परशुराम की मूर्ति सहित कलश ब्राह्मण को भेंट करें. इन क्रियाओं के पश्चात परायण करके अन्न जल ग्रहण करें. पश्चिमी राजस्थान में आंवला वृक्ष नही होने पर औरते खेजड़ी वृक्ष की पुजा करती हैं.

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