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अमर उजाला अपराजिता कार्यक्रम में पहुंचे गेस्ट
– फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला कार्यालय में बृहस्पतिवार को अपराजिता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में काफी संख्या में छात्राएं, बिजेनस वूमेंन, फिल्म मेकर, प्रोफेशनल आर्टिटिस, छात्र नेता के रूप में मौजूद युवाओं ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में मनोरोग विशेषज्ञ डाक्टर सोना कौशल मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। अपराजिता की थीम थी दिमाग को शांत किस प्रकार रखें। मनोरोग विशेषज्ञ ने कार्यक्रम में युवाओं को जानकारी दी कि दिमाग पर ज्यादा जोर नहीं देना है, इसे शांत रखने की आवश्यकता है।
अपराजिता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डाक्टर सोना कौशल ने कहा कि डब्लूएचओ की रिपोर्ट बताती है कि आज चार में एक बच्चा डिप्रेशन का शिकार हो रहा है। आने वाले कुछ सालों में यह संख्या तेजी से बढ़ेगी। उन्होंने तीन एस का उदाहरण देते हुए कहा कि सेल्फ, सेल्फेसिटी और सक्सेस। हमारे सब लोगों की जिंदगी तीन चीजों के आसपास घूमती है। एक तो होता है मैं, दूसरी होती है मेरी फैमिली और तीसरी होता है मेरा काम। अब हम यह देखते है कि इन तीनों चीजों में सबसे ज्यादा महत्व किसको देते हैं। इस पर कार्यक्रम में मौजूद युवाओं ने कहा कि यदि वह खुश होंगे तो सब चीजें अपने आप सरल होती चली जाएगी। यदि मैं ही खुश नहीं हूं तो बाहर वाला कितना भी प्रसन्न हो, इससे मुझे कोई फायदा नहीं।
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डाक्टर सोना कौशल ने कहा कि उनका पेशा तो चिकित्सक का है, इस पेशे के बारे में कहा जाता है कि दूसरों की सेवा करों। अभी भी लोग यही कहते हैं, लेकिन अब नजरिया बदल रहा है, लोग कहते हैं कि पहले अपना ध्यान रखों, बाद में दूसरों को देखना। सब कहते हैं कि खुश रहो, लेकिन खुश किस प्रकार रहा जा सकता है। पहले लोग कहते थे कि ज्यादा हंसने वाले बाद में बहुत रोते हैं। बाहर की अलग-अलग दुनिया है। नजरिया अब धीरे-धीरे बदल रहा है। गुस्सा तब आता है, जब यह लगता है कि मैं गलत हूं और वह सही। अगर आपको खुश रहना है तो आपको आई पर ध्यान देना होगा। अपनी बात रखते वक्त गुस्सा नहीं बल्कि पूरा आत्मविश्वास झलकना चाहिए।
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