Amar Ujala Aparajita: कभी कलम को रोका गया था…आज लेखन में दिख रही मातृशक्ति की प्रतिभा

[ad_1]

Amar ujala Aprajita Sanwad In Dehradun On Women in field of Hindi writing

अमर उजाला अपराजिता संवाद में महिलाएं
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


महिलाएं लेखन क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन कुछ लोगों ने महिलाओं की कलम को रोका था। इसके बाद भी महिलाओं की कलम नहीं रुकी। जो लेखन केवल महिलाओं के सौंदर्य तक सीमित था वो अब उनकी प्रतिभा को दिखा रहा है। जिसे महिला साहित्यकारों ने ही तोड़ा है। आगे बढ़ने के लिए महिलाओं को अपनी लड़ाई खुद ही लड़नी होगी। यह बात डॉ. क्षमा कौशिक ने पटेल नगर स्थित अमर उजाला कार्यालय में बुधवार को अपराजिता अभियान के तहत आयोजित संवाद कार्यक्रम में कही। उन्होंने महिलाओं के बारे में कहा, कोई नहीं छल सकता तुमको यदि तुम खुद को छलना छोड़ दो।

कार्यक्रम का मुख्य विषय लेखन के क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका रहा। इस दौरान प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आईं कवियित्री, लेखिका, साहित्यकार और समाज सेविकाओं ने अपनी लेखन की प्रतिभा को बखूबी दिखाया। इसके साथ ही कुछ नई लड़कियां भी कार्यक्रम में शामिल हुईं जिन्होंने लेखन कार्य शुरू किया है। महिलाओं ने अपनी लिखी कविताओं और गाने सुनाकर सभी का दिल जीत लिया।

Uttarakhand: टनकपुर में सीएम धामी ने बहनों से बंधवाई राखी, कहा- आत्मनिर्भर बन रहीं प्रदेश की मातृशक्ति

कार्यक्रम में महिलाओं ने कहा कि आज लेखन के क्षेत्र में महिलाएं आगे आ रहीं हैं। महिलाओं को लिखने का मौका मिला तो उन्होंने अपनी लेखनी से साबित किया है कि उनकी प्रतिभा सौंदर्य तक सीमित नहीं है। लेकिन, आज जो नई पीढ़ी है उसे लिखने से पहले उस लेखक वाले दर्द से गुजरना होगा। उन्हें नदी के बहाव, तारों की टिमटिमाहट, सूरज की रोशनी, चंदा की रोशनी और हवा की सरसराहट को महसूस करना होगा। अच्छा लेखक वही बन सकता है जिसने चोट खाई है। दर्द को महसूस किया है।

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *