Delhi : दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- दंपती के कमरे से बरामद नशीले पदार्थ के लिए सिर्फ पति जिम्मेदार नहीं

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Husband is not only responsible for drugs recovered from the couple's room, says Delhi High Court

दिल्ली हाईकोर्ट
– फोटो : एएनआई

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उच्च न्यायालय ने कहा कि दंपती के कमरे से बरामद नशीले पदार्थ के लिए पति और पत्नी दोनों जिम्मेदार हैं, यदि दोनों नशा करते हैं। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने कहा कि कमरे से गांजे की बरामदगी भले ही पति के कहने पर हुई हो लेकिन इसे जोड़े के संयुक्त स्थान से बरामद किया गया था। इसलिए अकेले पति पर जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती। 

अदालत पति और पत्नी दोनों के खिलाफ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) द्वारा नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (एनडीपीएस अधिनियम) के तहत दर्ज एक मामले में पत्नी द्वारा दायर जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अदालत ने कहा कि यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि आवेदक और उसके पति क्रुणाल गोलवाला को कमरे में रखे गए प्रतिबंधित पदार्थ के बारे में पता था और उन्होंने इसे सचेत रूप से अपने कब्जे में रखा था।

यह मामला टेलीग्राम मैसेजिंग ऐप के माध्यम से संचालित होने वाले एक कथित ड्रग सिंडिकेट से संबंधित है। 2021 में, जोड़े के आवास और पति के कार्यालय परिसर में ड्रग्स बरामद किए गए थे।

महिला के वकील ने तर्क दिया कि 1 किलो 30 ग्राम गांजा की बरामदगी उसके पति के कहने पर हुई थी न कि उनकी मुवक्किला के कहने पर। हालाँकि कोर्ट ने कहा कि कहीं भी यह तर्क नहीं दिया गया कि पति-पत्नी अलग-अलग कमरों में रह रहे थे या उनके रिश्ते तनावपूर्ण थे।

अदालत ने कहा बरामदगी किसी व्यक्ति से नहीं बल्कि संयुक्त स्थान से की गई थी और इसलिए यह कहना कि शयनकक्ष से की गई 1.03 किलोग्राम की बरामदगी के लिए आवेदक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है यह गलत दावा होगा।

अदातल ने कहा वे याची के वकील द्वारा दिए गए तर्क से सहमत होने में असमर्थ है। आवेदक के शयनकक्ष (अर्थात आवासीय परिसर) से गांजे की बरामदगी के लिए आवेदक और पति सह-अभियुक्त क्रुणाल गोलवाला दोनों जिम्मेदार हैं।

हालाँकि चूंकि मामले में बरामद गांजा मध्यवर्ती मात्रा के अंतर्गत आता है, इसलिए अदालत ने कहा कि एनडीपीएस अधिनियम की धारा 37 के तहत कड़ी जमानत शर्तें लागू नहीं होंगी। अदालत ने कहा कि वह ड्रग-डीलर है या नहीं, यह केवल मुकदमे के दौरान ही पता लगाया जा सकता है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि महिला के भागने का खतरा नहीं है और सबूतों के साथ छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित करने की कोई आशंका नहीं है, अदालत ने उसे जमानत दे दी।

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