Delhi : कृषि भूमि के सर्किल रेट बढ़ाने की फाइल एलजी ने लौटाई, लगाईं दो आपत्तियां

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Delhi : LG returned the file to increase the circle rate of agricultural land

वीके सक्सेना, उपराज्यपाल दिल्ली।
– फोटो : social media

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उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने कृषि भूमि के सर्किल रेट बढ़ाने की फाइल पर दो आपत्ति लगाकर दिल्ली सरकार को लौटा दी है। सात अगस्त को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 15 साल बाद कृषि भूमि के सर्किल रेट बढ़ाने का फैसला लिया था। इस फैसले के तहत कृषि भूमि के दाम को 10 गुना तक बढ़ाया गया था। 

दिल्ली में कृषि भूमि का सर्किल रेट अभी 53 लाख रुपये प्रति एकड़ है, जिसे बढ़ाकर 2.5 से पांच करोड़ रुपये प्रति एकड़ करने का प्रस्ताव पास करके दिल्ली सरकार ने उपराज्यपाल को भेजा था। 

बता दें कि दिल्ली में क्षेत्र के आधार पर तय किए गए अलग-अलग सर्किल रेट को लेकर किसान यूनियन सहित अन्य लोगों ने आपत्ति जाहिर की थी। इन सभी के तरफ से उपराज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया था कि पहले की तरह पूरी दिल्ली में सर्किल रेट एक सामान होना चाहिए। दिल्ली सरकार ने नई दिल्ली में सर्किल रेट को बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये तक किया है। यह दर पूरी दिल्ली में एक सामान लागू होनी चाहिए। 

पहले भी कई काम रोक चुके हैं उपराज्यपाल

दिल्ली सरकार के सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सर्किल रेट बढ़ाकर किसानों को सौगात दी थी, लेकिन उपराज्यपाल ने इस पर रोक लगा दी। सूत्रों का कहना है कि यह पहला मामला नहीं है इससे पहले भी उपराज्यपाल दिल्ली सरकार के कई काम को रोक चुके हैं।

इससे पहले मुफ्त योग क्लास, सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को ट्रेनिंग के लिए फिनलैंड भेजना सहित अन्य शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि राजस्व मंत्री आतिशी ने कृषि भूमि के सर्किल रेट बढ़ाने के प्रस्ताव को सीएम अरविंद केजरीवाल के समक्ष रखा था, जिसे उन्होंने तत्काल अपनी मंजूरी दे दी थी। 

इस कारण वापस हुई फाइल 

सर्कल रेट से जुड़े फाइल को लौटाते हुए दो आपत्ति लगाई गई है। इसमें दक्षिण-पश्चिम जिले में ग्रामीण और शहरी गांवों के लिए दरों के अंतर पर ध्यान देने को कहा गया है। साथ ही एक ही गांव जिसका कुछ हिस्सा ग्रामीण है और कुछ हिस्सा शहरी, ऐसे गांव को लेकर अस्तित्वहीन सीमांकन से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। यहां पर अधिकारी अपनी विवेक से  कुछ भी कर सकते हैं। उपराज्यपाल कार्यालय के तरफ से फाइल में कहा गया कि प्रस्तावित दरें कार्य समूह की 15.04.2017 की रिपोर्ट पर आधारित हैं।

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