Delhi : दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी- 1947 में आजादी हासिल की पर सामाजिक-आर्थिक स्वतंत्रता अब भी दूर

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– फोटो : ANI

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दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को दुख जताते हुए कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के बच्चे निजी स्कूलों में प्रवेश के अपने अधिकार पाने में सक्षम नहीं हैं। अदालत ने दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय (डीओई) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम को अंक्षरश: लागू किया जाए ताकि ईडब्ल्यूएस को उचित प्रतिनिधित्व मिले।

न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह ने अपने फैसले में कहा कि आज देशवासी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, क्योंकि हमने 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता हासिल की थी, लेकिन सामाजिक और आर्थिक स्वतंत्रता अब भी हमसे दूर है। अदालत ने कहा कि यह सही समय है कि न्यायपालिका कदम उठाए क्योंकि लोग अपने मौलिक अधिकारों का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। अदालत ने कहा, सभी निजी स्कूल यह सुनिश्चित करेंगे कि अधिनियम के प्रावधानों को अंक्षरश: लागू किया जाए।

अदालत ईडब्ल्यूएस कोटा के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश की मांग करने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों की 39 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।  बच्चों के पास डीओई से पुष्ट प्रवेश पत्र होने के बावजूद, स्कूलों ने उन्हें प्रवेश देने से मना कर दिया। याचिकाकर्ताओं के वकील ने दावा किया कि चोट के अपमान को जोड़ने के लिए, शॉर्टलिस्ट किए गए छात्रों और उनके माता-पिता के चेहरे पर स्कूल के गेट सचमुच बंद कर दिए गए है।

अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कोई भी छोटे बच्चों और उनके माता-पिता द्वारा सामना किए गए अपमान की कल्पना कर सकता है। यह न्यायालय संविधान के संरक्षक के रूप में शिक्षा प्रदान करने की महान सेवा में मानव अधिकारों के एकमुश्त बुलडोजर के लिए एक मूक दर्शक नहीं बन सकता है। अदालत ने अपने फैसले में कई अहम निर्देश जारी करते हुए कहा कि सभी स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि आरटीई अधिनियम के प्रावधानों को अंक्षरश: लागू किया जाए। ईडब्ल्यूएस छात्रों को प्रवेश से वंचित नहीं किया जाएगा या उनके साथ अशोभनीय आचरण किया जाएगा। गलती करने वाले स्कूलों के मामले में शिक्षा विभाग सख्त आदेश जारी करेगा और मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करने में संकोच नहीं करेगा।

निर्धारित अवधि में प्रवेश सुनिश्चित करें डीओई
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि डीओई यह सुनिश्चित करेगा कि शॉर्टलिस्ट किए गए और पड़ोस के स्कूल में प्रवेश के लिए अधिसूचित सभी छात्रों को जल्द से जल्द एक महीने के भीतर या अधिनियम के प्रावधानों के अधीन उपयुक्त प्राधिकारी द्वारा निर्धारित अवधि के भीतर प्रवेश दिया जाएगा। इस संबंध में अदालत ने डीओई को ईडब्ल्यूएस कोटा के तहत संबंधित पड़ोस के स्कूलों में प्रवेश के लिए उपयुक्त पाए गए बच्चे और उनके माता-पिता की साख को प्रमाणित करने के लिए जांच करने और आवश्यक दस्तावेज मांगने का निर्देश दिया।अदालत ने स्पष्ट किया कि स्कूल द्वारा किए गए तथ्य-खोज अभ्यास के आधार पर उम्मीदवार की साख पर संदेह या संदेह, प्रवेश से इन्कार करने का आधार नहीं हो सकता है। 

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दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को दुख जताते हुए कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के बच्चे निजी स्कूलों में प्रवेश के अपने अधिकार पाने में सक्षम नहीं हैं। अदालत ने दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय (डीओई) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम को अंक्षरश: लागू किया जाए ताकि ईडब्ल्यूएस को उचित प्रतिनिधित्व मिले।

न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह ने अपने फैसले में कहा कि आज देशवासी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, क्योंकि हमने 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता हासिल की थी, लेकिन सामाजिक और आर्थिक स्वतंत्रता अब भी हमसे दूर है। अदालत ने कहा कि यह सही समय है कि न्यायपालिका कदम उठाए क्योंकि लोग अपने मौलिक अधिकारों का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। अदालत ने कहा, सभी निजी स्कूल यह सुनिश्चित करेंगे कि अधिनियम के प्रावधानों को अंक्षरश: लागू किया जाए।

अदालत ईडब्ल्यूएस कोटा के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश की मांग करने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों की 39 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।  बच्चों के पास डीओई से पुष्ट प्रवेश पत्र होने के बावजूद, स्कूलों ने उन्हें प्रवेश देने से मना कर दिया। याचिकाकर्ताओं के वकील ने दावा किया कि चोट के अपमान को जोड़ने के लिए, शॉर्टलिस्ट किए गए छात्रों और उनके माता-पिता के चेहरे पर स्कूल के गेट सचमुच बंद कर दिए गए है।

अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कोई भी छोटे बच्चों और उनके माता-पिता द्वारा सामना किए गए अपमान की कल्पना कर सकता है। यह न्यायालय संविधान के संरक्षक के रूप में शिक्षा प्रदान करने की महान सेवा में मानव अधिकारों के एकमुश्त बुलडोजर के लिए एक मूक दर्शक नहीं बन सकता है। अदालत ने अपने फैसले में कई अहम निर्देश जारी करते हुए कहा कि सभी स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि आरटीई अधिनियम के प्रावधानों को अंक्षरश: लागू किया जाए। ईडब्ल्यूएस छात्रों को प्रवेश से वंचित नहीं किया जाएगा या उनके साथ अशोभनीय आचरण किया जाएगा। गलती करने वाले स्कूलों के मामले में शिक्षा विभाग सख्त आदेश जारी करेगा और मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करने में संकोच नहीं करेगा।

निर्धारित अवधि में प्रवेश सुनिश्चित करें डीओई

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि डीओई यह सुनिश्चित करेगा कि शॉर्टलिस्ट किए गए और पड़ोस के स्कूल में प्रवेश के लिए अधिसूचित सभी छात्रों को जल्द से जल्द एक महीने के भीतर या अधिनियम के प्रावधानों के अधीन उपयुक्त प्राधिकारी द्वारा निर्धारित अवधि के भीतर प्रवेश दिया जाएगा। इस संबंध में अदालत ने डीओई को ईडब्ल्यूएस कोटा के तहत संबंधित पड़ोस के स्कूलों में प्रवेश के लिए उपयुक्त पाए गए बच्चे और उनके माता-पिता की साख को प्रमाणित करने के लिए जांच करने और आवश्यक दस्तावेज मांगने का निर्देश दिया।अदालत ने स्पष्ट किया कि स्कूल द्वारा किए गए तथ्य-खोज अभ्यास के आधार पर उम्मीदवार की साख पर संदेह या संदेह, प्रवेश से इन्कार करने का आधार नहीं हो सकता है। 



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