Delhi : रामपुर के एक मामले में यूपी सरकार से सुप्रीम सवाल, क्या आप मानते हैं-बुलडोजर चलाना गलत

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Supreme court asks UP government, do you believe it is wrong to run bulldozers

सुप्रीम कोर्ट
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा, तो क्या आप घरों पर बुलडोजर चलाने को गलत मानते हैं? दरअसल, यूपी सरकार ने रामपुर में एक व्यक्ति के घर पर बुलडोजर चलाने वाले एक आरोपी फसाहत अली खान की जमानत का विरोध किया था। इस पर जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ ने सरकार की खिंचाई की। उनका इशारा यूपी सरकार की आरोपियों के घरों पर बुलडोजर कार्रवाई की ओर था।

जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता के वकील ने कहा, हमारे मुवक्किल के खिलाफ दायर मामला राजनीति से प्रेरित था। चुनाव के दौरान ये मामले दर्ज किए गए थे। उन्होंने कहा, वे (पुलिस) कह रहे हैं कि हिरासत में पूछताछ की जरूरत है लेकिन परिस्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। सभी एफआईआर राजनीति से प्रेरित हैं। इस पर यूपी के अतिरिक्त महाधिवक्ता (एएजी) आरके रायजादा ने कहा, पिछली एफआईआर और उसके अपराधों पर पहले विचार नहीं किया गया था। इसलिए हाईकोर्ट ने कहा था कि उन पर विचार किया जाना चाहिए। वह हाईकोर्ट के सामने पेश नहीं हुआ। यह आदमी एक पुलिस अधिकारी के साथ था। वह एक राजनीतिक पार्टी के लिए काम कर रहा था। उसने एक व्यक्ति के घर पर बुलडोजर चलाया और घर से 20 हजार लूट लिए।

पिछले साल दंगों के मामलों में आरोपियों   के घरों पर यूपी, मप्र में चला था बुलडोजर

पिछले साल दंगों के मामलों में आरोपी व्यक्तियों के घरों को ध्वस्त करने के लिए उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि में अथॉरिटी की ओर से की गई बुलडोजर कार्रवाई को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में कई जनहित याचिकाएं दायर की गईं थीं। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि अथॉरिटी मुकदमे के बाद और अपराध साबित होने से पहले ही आरोपियों को दंडित करने के लिए न्यायेतर और असंगत कार्रवाइयों का सहारा ले रहे हैं।      

अथॉरिटी का कहना है कि वे अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। पिछले साल इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा था कि वह कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अलावा विध्वंस गतिविधियों को अंजाम न दे। हालांकि उत्तर प्रदेश राज्य ने एक हलफनामा दायर कर सफाई दी थी कि कानपुर और प्रयागराज में किए गए विध्वंस स्थानीय विकास प्राधिकरणों की ओर से उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन और विकास अधिनियम, 1973 के अनुसार थे। राज्य ने स्पष्ट रूप से इन्कार कर दिया था कि विध्वंस दंगों से जुड़े थे। सरकार का कहना था कि यह प्रक्रिया भवन नियमों के उल्लंघन पर शुरू की गई थी।

जस्टिस कौल बोले-तो आप सिद्धांत का पालन नहीं करेंगे

रायजादा की दलील पर जस्टिस कौल ने पूछा, तो आप सहमत हैं कि मकानों पर बुलडोजर चलाना गलत है? क्या आप निश्चित रूप से मकानों पर बुलडोजर चलाने के सिद्धांत का पालन नहीं करेंगे? क्या हमें आपका बयान दर्ज करना चाहिए। पीठ का इशारा संभवतः आरोपी व्यक्तियों के घरों को ध्वस्त करने के लिए यूपी अथॉरिटी की ओर से की जा रही बुलडोजर कार्रवाई की ओर था। तब एएजी ने हंसते हुए कहा, मेरी दलील इस मामले तक ही सीमित है। पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया और ट्रायल कोर्ट को दी गई जमानत को बहाल कर दिया।

क्या है मामला

पीठ इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें फसाहत अली खान नामक व्यक्ति को दी गई जमानत को रद्द कर दिया गया था। उस पर 2016 में रामपुर में एक व्यक्ति के घर को बुलडोजर से जबरदस्ती गिराने और घर से 20 हजार रुपए लूटने का आरोप है। फसाहत को सपा सांसद आजम खां का करीबी माना जाता है। हाईकोर्ट ने जमानत को रद्द करने के आधार के रूप में उसके खिलाफ अन्य आपराधिक मामलों के लंबित होने का हवाला दिया था।

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