Delhi News: हाईकोर्ट ने बच्चे की हत्या के दोषी की मौत की सजा को कम किया

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सजा को बिना किसी छूट के 20 साल के कठोर कारावास में बदला

अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2009 में नाबालिग लड़के के अपहरण और हत्या के लिए व्यक्ति को दी गई मौत की सजा को कम कर दिया। अदालत ने जीवक नागपाल को दी गई सजा को संशोधित करते हुए बिना छूट के 20 साल के कठोर कारावास में बदल दिया। नागपाल को 2020 में ट्रायल कोर्ट द्वारा मौत की सजा सुनाई गई थी। अपराध के समय वह 21 वर्ष का था और दोषी ठहराए जाने पर 32 वर्ष का था।

न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता और न्यायमूर्ति अनीश दयाल की खंडपीठ ने अपीलकर्ता की सजा को 20 साल तक बिना किसी छूट के आजीवन कठोर कारावास में बदल दिया और 1 लाख का जुर्माना न अदा करने की स्थिति में छह महीने के साधारण कारावास की सजा अलग से भुगतनी होगी। अदालत ने कहा कि आईपीसी की धारा 364ए, 201 और 506 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए निचली अदालत द्वारा दी गई सजाएं संशोधित नहीं की गई हैं और वही रहेंगी।

नागपाल नाबालिग पीड़ित का पड़ोसी था। शिकायतकर्ता के अनुसार, नागपाल ने मार्च 2009 में नाबालिग का अपहरण कर लिया और पिता से फिरौती मांगी। नागपाल को अपनी कार के जैक हैंडल से चोट पहुंचाकर और उसका गला दबाकर हत्या करने का दोषी ठहराया गया था। उसने पीड़ित के शव को सूखे नाले में फेंक दिया था। पीठ ने कहा कि भले ही फिरौती के लिए नाबालिग के अपहरण का अपराध पूर्व नियोजित तरीके से किया गया था, लेकिन यह नहीं माना जा सकता कि हत्या पूर्व नियोजित तरीके से की गई थी।

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