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दिवाली का त्योहार
– फोटो : iStock
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सुख सौभाग्य के साथ ही अंधेरे से प्रकाश की ओर ले जाने वाले महापर्व दीपावली पर इस बार महासंयोग निर्मित हो रहे हैं। तिथियों के बढ़ने के कारण पंचददीपोत्सव इस बार छह दिन के होंगे। 10 नवंबर को धनतेरस से पंच दीपोत्सव की शुरुआत होगी और 15 नवंबर को भैयादूज के साथ इसका समापन होगा।
काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के सदस्य पं. दीपक मालवीय ने बताया कि पंच दीपोत्सव में इस बार तिथियों के अंतर के कारण धनतेरस 10 नवंबर को है। कार्तिक कृष्णपक्ष की त्रयोदशी 10 नवंबर को दिन में 12:36 मिनट से 11 नवंबर को दिन में 1:59 बजे तक रहेगी। चित्रा नक्षत्र 10 नवंबर को रात्रि 12:08 बजे से 11 नवंबर को रात्रि 1:47 बजे तक रहेगा। 11 नवंबर को दोपहर 1:58 बजे चतुर्दशी तिथि आ जाएगी। इस कारण 12 नवंबर को प्रात:काल में रूप चतुर्दशी का स्नान होगा।
12 नवंबर को मध्याह्न 2:45 बजे अमावस्या आ जाएगी। इसलिए 12 नवंबर को ही महालक्ष्मी पूजन और दीपोत्सव मनाया जाएगा। 14 नवंबर को कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा नौ मुहूर्त से अधिक होने पर 14 नवंबर को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट होगा और भाई दूज का पर्व 15 नवंबर को मनाया जाएगा। आमतौर पर धनतेरस के दूसरे दिन रूप चतुर्दशी या नरक चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है, लेकिन इस बार तिथियां के अंतर के कारण नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली और दीपावली दोनों एक ही दिन होंगे। 12 नवंबर को प्रातःकाल रूप चतुर्दशी और शाम में दीपोत्सव व महालक्ष्मी पूजन होगा।
दीपावली महापर्व की तिथियां
धनतेरस- 10 नवंबर
मासिक शिवरात्रि और हनुमान जयंती – 11 नवंबर
छोटी दीपावली या रूप चौदस और दीपावली – 12 नवंबर
सोमवती एवं देव पितृकार्य अमावस्या – 13 नवंबर
गोवर्धन पूजा – 14 नवंबर
भाई दूज – 15 नवंबर
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