Floriculture: सूबे में घट गया पुष्प उत्पादन का कारोबार, सिर्फ 262 हेक्टेयर में हो रही खेती

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himachal news: decline in flower cultivation area only 262 hectares land used for flower cultivation

प्रतीकात्मक तस्वीर
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सूबे में फूलों की खेती सिमट रही है। कम किसान रह गए हैं, जो इस कारोबार को तवज्जो दे रहे हैं। किसानों का खेती के प्रति कम रुझान के बाद अब कारोबारियों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। हिमाचल में पुष्प क्रांति तो नहीं आई, उल्टा उत्पादन का क्षेत्र भी कम हो गया है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि परवाणू स्थित सूबे की पहली फूल मंडी भी बंद होने के कगार पर पहुंच चुकी है। इस साल मंडी में फूल नहीं बिके।

लिहाजा, कारोबारियों को दुकानों की चाबियां मंडी समिति को सौंपनी पड़ीं। अब इसे सेब मंडी के साथ मर्ज करने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। बता दें कि साल 2012 में सूबे में 915 हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती हो रही थी। धीरे-धीरे खेती का क्षेत्र घटता चला गया। कोरोना काल के दौरान 600 हेक्टेयर के करीब इसकी खेती रह गई। आज स्थिति यह है कि पूरे प्रदेश में महज 262 हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती हो रही है।

ये रही मुख्य वजह

फूलों की खेती सिमटने के पीछे कई वजह हैं। मार्केटिंग के लिए मंडी की सबसे बड़ी समस्या है। फूल जल्द मुरझाता है। इसके तैयार होते ही उत्पादकों की पहुंच मंडी तक नहीं होती। मंडियों में कोल्ड स्टोर की व्यवस्था बेहद जरूरी है। इसका भी अभाव रहा है। ऐसे कई कारण हैं जिससे किसानों का फूलों की खेती से मोहभंग हो रहा है।

पूर्व सरकार लाई थी पुष्प क्रांति योजना

पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने प्रदेश में फूलों की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए पुष्प क्रांति योजना की शुरुआत की थी। योजना को 150 करोड़ की पंचवर्षीय योजना के रूप में लागू किया गया लेकिन युवाओं व किसानों का रुझान इस खेती की तरफ ज्यादा नहीं बढ़ सका।

विभाग और सरकार लगातार प्रयासरत

डॉ. वाईएस परमार बागवानी विश्वविद्यालय के फ्लोरीकल्चर विभाग के अध्यक्ष डॉ. एसआर धीमान ने बताया कि फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए विभाग और सरकार लगातार प्रयासरत हैं। सिरमौर गुलदाउदी फूलों की खेती में अग्रणी है। बबूने जैसे औषधीय फूल की खेती भी हो रही है। किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है ताकि फूलों की खेती को बढ़ाया जा सके।

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