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नशीली दवाएं पकड़ी गई।
– फोटो : अमर उजाला।
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आगरा से लोड होकर गोरखपुर के ठग व्यापारियों की मदद से नेपाल और बांग्लादेश में नशीली दवाएं भेजी जाती हैं। हर महीने करोड़ा का खेल होता है, लेकिन तह तक जिम्मेदार नहीं पहुंच पाते हैं। सवाल उठता है कि नशीली दवाओं के कारोबारियों को आखिर किसकी सरपरस्ती है कि यह बच जाते हैं और सिर्फ सप्लायर को जेल भेजने तक ही जांच सीमित हो जाती है।
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, इसके पहले भी अगस्त 2022 में ड्रग विभाग की बाहर से आई टीम ने दो करोड़ रुपये कीमत की प्रतिबंधित नशीली दवाओं को पकड़ा था। लेकिन इन सब के मुख्य आरोपियों दवा कारोबारी गुप्ता बंधुओं तक पुलिस के हाथ नहीं पहुंच पाए थे और वह स्टे लेकर बच गए। हालांकि, पुलिस ने उन्हें आरोपी बनाते हुए कोर्ट में चार्जशीट दाखिल किया है।
जानकारों के मुताबिक, प्रतिबंधित दवाओं की खरीद-फरोख्त का लाइसेंस कुछ ही दवा व्यापारियों के पास है। जब भी दवा बरामद होती है तो उस पर कंपनी का नाम अंकित होता है। ऐसे में अगर उस कंपनी के दवा कारोबारी तक पहुंचना हो तो मामला और आसान हो जाता है।
मसलन, शुक्रवार को जिस कंपनी की दवा पकड़ी गई है, उसे बेचने का लाइसेंस महज 17 लोगों के पास है। अगर, दवा की इतनी बड़ी खेप बाहर आई है तो बिना किसी के रजामंदी से यह संभव ही नहीं है। हालांकि, अभी इस दवा की जांच नहीं हो पाई है कि यह गोरखपुर मंडी से लिया गया है या किसी और जगह से आया है। पुलिस एक-एक बिंदु पर जांच कर रही है।
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