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रीतिका के साथ केले के रेशे से ज्वेलरी बनातीं समूह की सदस्य।
– फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
12वीं में पढ़ने वाली रीतिका मौर्या ने दो साल पहले गोरखपुर महोत्सव में जूट से बने आकर्षक सजावटी सामान देखा तो उन्हें यह आइडिया भा गया। उन्होंने यू-टयूब खंगाला तो उनकी नजर केले के रेशे से बनी आर्टिफिशियल ज्वेलरी पर पड़ी।
उन्होंने भी इन वीडियो से सीखकर हाथ आजमाया तो कामयाबी मिलने लगी। उनका यह शौक आज कमाई का एक जरिया भी बन चुका है। उनके साथ 40 से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। उनकी बनाई ज्वेलरी की देश-विदेश में खूब डिमांड है।
शिवपुर सहबाजगंज की रहने वाली रितिका मौर्या की मां सुनीता ने बताया कि बेटी के जुनून को देखकर कुशीनगर से केले का रेशा ले आईं। उसने यू-टयूब की मदद से इस रेशे से 12 गुड़िया बनाई, जो मोहल्ले के लोगों ने तुरंत खरीद लिया।
इससे उत्साह बढ़ा और उसने टोपी, सजावटी सामान और आर्टिफिशियल ज्वेलरी बनानी शुरू कर दी, जिसकी बिक्री अब बढ़ रही है। वर्तमान में 40 से अधिक महिलाएं अलग-अलग समूह बनाकर केले के रेशे से ज्वेलरी बना रही हैं। इसके साथ ही चेन्नई, हैदराबाद सहित अन्य जगहों पर लोग प्रशिक्षण देने के लिए भी बुला रहे हैं।
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