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गोरखपुर में प्रदूषण के कारण छाई धुंध।
– फोटो : अमर उजाला।
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कोरोना काल में हवा की गुणवत्ता बहुत हद तक सुधर गई थी। तब खुले में सांस लेने वाली स्थिति बनी थी। उसके बाद जैसे-जैसे कल कारखाने और वाहन दौड़े, फिर शहर की हवा में जहर फैलता चला गया। मौजूदा हाल में कोरोना के समय की तुलना में ब्लैक कार्बन नाम का यह जहर वायुमंडल में अब करीब आठ से दस गुना ज्यादा है। इसी प्रकार सेहत के लिए बेहद खतरनाक सल्फर डाई आक्साइड की मात्रा भी 60 से 70 फीसदी तक बढ़ गई है।
ये तथ्य गोरखपुर विश्वविद्यालय के भौतिकी विज्ञान विभाग के ”एनवायरमेंटल साइंस एंड पॉल्युशन” पर कराए रिसर्च में सामने आया है। भौतिक विज्ञान विभाग के प्रोफेसर प्रो. शांतनु रस्तोगी के निर्देशन में प्रयागराज सिंह व आदित्य वैश्य ने लॉकडाउन के दौरान 22 मार्च से 31 मई 2020 तक पर्यावरण के आंकड़े लेकर उसका वर्ष 2015 से 2019 में प्रदूषण के आंकडों से तुलनात्मक अध्ययन किया। हाल ही में शोध पत्र का प्रकाशन भी हुआ।
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