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ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में शिवलिंग मिलने का दावा किया जा रहा है।
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
वाराणसी के बहुचर्चित ज्ञानवापी मामले में वर्ष 1991 का एक मुकदमा है। इसमें विवादित स्थल का रडार तकनीक से पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने की मांग की गई है। फिलहाल इस मुकदमे में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रखा है।
वर्ष 1991 में प्राचीन मूर्ति स्वयंभू लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ व अन्य बनाम अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी व अन्य का वाद दाखिल किया गया था। लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने 10 दिसंबर 2019 को जिला अदालत में प्रार्थना पत्र देकर ज्ञानवापी परिसर के विवादित स्थल का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से रडार तकनीक से सर्वेक्षण कराने की अपील की थी।
मसाजिद कमेटी ने हाईकोर्ट में की थी अपील
08 अप्रैल 2021 को सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट आशुतोष तिवारी की अदालत ने विजय शंकर रस्तोगी के आवेदन को स्वीकार कर सर्वेक्षण का आदेश दिया था। सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड और अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी की अपील पर सितंबर 2021 में हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी परिसर के विवादित स्थल के रडार तकनीक से सर्वेक्षण पर रोक लगा दी थी।
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