Himachal: पुलिस कांस्टेबल भर्ती पेपर लीक मामले में सीबीआई ने दर्ज कीं दो एफआईआर

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पुलिस कांस्टेबल भर्ती पेपर लीक मामला(सांकेतिक )

पुलिस कांस्टेबल भर्ती पेपर लीक मामला(सांकेतिक )
– फोटो : अमर उजाला

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 हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित पुलिस कांस्टेबल भर्ती पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दो एफआईआर दर्ज की हैं। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद सीबीआई ने ये दोनों एफआईआर चंडीगढ़ ब्रांच में पंजीकृत की हैं। प्रारंभिक तौर पर दोनों प्राथमिकी में सीबीआई ने पांच आरोपियों को नामजद किया है। इनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 120बी के तहत मामला दर्ज किया गया है। सीबीआई ने इस मामले की जांच का जिम्मा डीएसपी रैंक के दो अधिकारियों को दिया है। कांगड़ा जिला के पुलिस थाना गगल में 5 मई 2022 को दर्ज हुई एफआईआर को आधार बनाकर दर्ज की गई प्राथमिकी की जांच डीएसपी दिनेश कुमार को सौंपी गई है। साथ ही सीआईडी थाना शिमला में सात मई 2022 को दर्ज मामले को आधार बनाकर दायर एफ आईआर की तफ्तीश डीएसपी रविंद्र कुश को दी गई है। 

पुलिस ने 5 मई, सीआईडी ने 7 मई को दर्ज की एफआईआर 
हिमाचल में सबसे पहले कांगड़ा पुलिस ने पांच मई को मुनीष कुमार, मनी चौधरी और गौरव के खिलाफ कुछ अज्ञात लोगों के साथ मिलकर पुलिस भर्ती पेपर लीक करने के आरोप में मामला दर्ज किया था। इस मामले की छानबीन कर रहे जांच अधिकारी अजय सिंह की लिखित शिकायत पर पुलिस ने तीनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 120बी के तहत केस दर्ज किया। अन्वेषण अधिकारी ने पाया था कि नामित आरोपियों ने कुछ अज्ञात लोगों से आपराधिक षड्यंत्र रचकर पुलिस आरक्षी भर्ती वर्ष 2021-22 की लिखित परीक्षा के होने से पहले ही पेपर हल करवाया और आरोपियों से मोटी रकम ऐंठकर जुर्म किया। कांगड़ा पुलिस ने इस मामले के तार हिमाचल प्रदेश के अन्य जिलों और बाहरी राज्यों से जुडे़ पाए। पूरे प्रदेश और राज्य से बाहर अपना क्षेत्राधिकार न होने पर राज्य सरकार ने इसकी जांच सीआईडी को सौंपी, जिसके बाद सीआईडी ने सात मई को दूसरी एफआईआर दर्ज की। सीआईडी ने एफआईआर में एक आरोपी सुनील कुमार को भी नामजद किया। 

18 मई को मांगी थी सीबीआई जांच की अनुमति
पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले में सीबीआई ने 18 मई को जांच की अनुमति मांगी थी, पर यह अनुमति लंबे वक्त से अटकी रही। केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने इसे 1 नवंबर को दिया है। केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने इस संबंध में हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव और सीबीआई निदेशक को भी सूचित कर दिया था। अब सीबीआई ने इस संबंध में दो एफआईआर दर्ज कर दी हैं। 

कांगड़ा, शिमला और मंडी में 181 लोगों के खिलाफ तीन चार्जशीट दायर
27 मार्च को 1334 पदों के लिए परीक्षा हुई थी। छह मई को यह परीक्षा विवादों के बाद रद्द हो गई। पुलिस और सीआईडी ने मामले दर्ज किए तो 31 मई को पांच आरोपियों की पहली बार गिरफ्तारियां हुईं। अब तक 181 लोगों के खिलाफ कांगड़ा, शिमला और मंडी में तीन चार्जशीट कोर्ट में दायर हो चुकी हैं। 

पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले में सीबीआई मंडी पुलिस से भी रिकॉर्ड कब्जे में लेगी।  अदालत में दायर चार्जशीट में पुलिस ने मंडी के आठ एजेंट और 19 अभ्यर्थियों समेत 27 को आरोपी बनाया है। मंडी पुलिस अपने स्तर पर भी मामले की जांच कर रही है। अब मामला सीबीआई में दर्ज हो गया है, ऐसे में मामले से जुड़ी कड़ियों को जांच के लिए नए सिरे से खंगाला जाएगा। पेपर लीक मामले की जड़ें मंडी से जुड़ी हैं। यह मामला सामने आने के बाद जिला मंडी में 70 से अधिक अंक लेने वाले करीब 50 परीक्षार्थियों से पूछताछ की गई। इस दौरान पुलिस के हाथ अहम सुराग लगे।

इन सुरागों के पुष्ट होने के बाद ही पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया और कई आरोपों जद में आए। संयुक्त प्री मेडिकल टेस्ट (सीपीएमटी) घोटाले के आरोपी मनोज ठाकुर का नाम भी सामने आया। इससे पूछताछ के बाद नेपाल बार्डर के समीप मोतीहारी से एजेंट चंद्रगुप्त और बिहार के पटना से अमन को गिरफ्तार किया है। नेपाल के चंद्रगुप्त ने मंडी पेपर पहुंचाए थे। इन्हें मंडी के मनोज ने अभ्यर्थियों को बांटा और उनसे पैसों की उगाही की। इसके बाद इन वसूले पैसों को पटना का अमन लेकर गया था। एसपी मंडी शालिनी अग्निहोत्री ने कहा कि नियमानुसार कार्य किया जाएगा।

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 हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित पुलिस कांस्टेबल भर्ती पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दो एफआईआर दर्ज की हैं। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद सीबीआई ने ये दोनों एफआईआर चंडीगढ़ ब्रांच में पंजीकृत की हैं। प्रारंभिक तौर पर दोनों प्राथमिकी में सीबीआई ने पांच आरोपियों को नामजद किया है। इनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 120बी के तहत मामला दर्ज किया गया है। सीबीआई ने इस मामले की जांच का जिम्मा डीएसपी रैंक के दो अधिकारियों को दिया है। कांगड़ा जिला के पुलिस थाना गगल में 5 मई 2022 को दर्ज हुई एफआईआर को आधार बनाकर दर्ज की गई प्राथमिकी की जांच डीएसपी दिनेश कुमार को सौंपी गई है। साथ ही सीआईडी थाना शिमला में सात मई 2022 को दर्ज मामले को आधार बनाकर दायर एफ आईआर की तफ्तीश डीएसपी रविंद्र कुश को दी गई है। 

पुलिस ने 5 मई, सीआईडी ने 7 मई को दर्ज की एफआईआर 

हिमाचल में सबसे पहले कांगड़ा पुलिस ने पांच मई को मुनीष कुमार, मनी चौधरी और गौरव के खिलाफ कुछ अज्ञात लोगों के साथ मिलकर पुलिस भर्ती पेपर लीक करने के आरोप में मामला दर्ज किया था। इस मामले की छानबीन कर रहे जांच अधिकारी अजय सिंह की लिखित शिकायत पर पुलिस ने तीनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 120बी के तहत केस दर्ज किया। अन्वेषण अधिकारी ने पाया था कि नामित आरोपियों ने कुछ अज्ञात लोगों से आपराधिक षड्यंत्र रचकर पुलिस आरक्षी भर्ती वर्ष 2021-22 की लिखित परीक्षा के होने से पहले ही पेपर हल करवाया और आरोपियों से मोटी रकम ऐंठकर जुर्म किया। कांगड़ा पुलिस ने इस मामले के तार हिमाचल प्रदेश के अन्य जिलों और बाहरी राज्यों से जुडे़ पाए। पूरे प्रदेश और राज्य से बाहर अपना क्षेत्राधिकार न होने पर राज्य सरकार ने इसकी जांच सीआईडी को सौंपी, जिसके बाद सीआईडी ने सात मई को दूसरी एफआईआर दर्ज की। सीआईडी ने एफआईआर में एक आरोपी सुनील कुमार को भी नामजद किया। 

18 मई को मांगी थी सीबीआई जांच की अनुमति

पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले में सीबीआई ने 18 मई को जांच की अनुमति मांगी थी, पर यह अनुमति लंबे वक्त से अटकी रही। केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने इसे 1 नवंबर को दिया है। केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने इस संबंध में हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव और सीबीआई निदेशक को भी सूचित कर दिया था। अब सीबीआई ने इस संबंध में दो एफआईआर दर्ज कर दी हैं। 

कांगड़ा, शिमला और मंडी में 181 लोगों के खिलाफ तीन चार्जशीट दायर

27 मार्च को 1334 पदों के लिए परीक्षा हुई थी। छह मई को यह परीक्षा विवादों के बाद रद्द हो गई। पुलिस और सीआईडी ने मामले दर्ज किए तो 31 मई को पांच आरोपियों की पहली बार गिरफ्तारियां हुईं। अब तक 181 लोगों के खिलाफ कांगड़ा, शिमला और मंडी में तीन चार्जशीट कोर्ट में दायर हो चुकी हैं। 



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