Holi 2024: बिहार की शिल्पी को किसी ने हानिकारक रंग लगाया तो साग-सब्जी से बना दिए हर्बल रंग, जानें पूरी कहानी

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Holi 2024: Shilpi Srivastava from Bihar made herbal colors from vegetables to avoid harmful chemical colours

साग सब्जियों से रंग बनातीं शिल्पी श्रीवास्तव
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


होली के त्योहार को अब कुछ ही दिन बचे हैं। ऐसे में लोगों को मौज-मस्ती करते हुए एक-दूसरे को खूब सारा रंग भी लगाना है, लेकिन लोगों को डर रहता है कि ऐसे-वैसे रंग से उनकी त्वचा खराब न हो जाए। इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार के मुजफ्फरपुर की निवासी शिल्पी श्रीवास्तव हरे-भरे साग और सब्जियों से होली के लिए हर्बल गुलाल बना रही हैं। खुद के लिए तैयार किए गए इन हर्बल गुलाल की मांग अब आसपास ही नहीं, बल्कि कई जगहों पर हो रही है और लोग इसको लेकर खूब चर्चा भी कर रहे हैं।

 

साग-सब्जी से बनाए जा रहे हर्बल रंग

शिल्पी ने बताया कि वह बेहद आसान तरीके से इन हर्बल गुलाल को अमूमन पालक, चुकंदर, हल्दी, अरारोट और नील से तैयार कर रही हैं। इन रंगों को वह खुद ही तैयार कर रही हैं। यह हर्बल गुलाल महज एक दिन में तैयार हो जाता है। ये रंग इस होली में अपनी अनोखी पहचान और छाप छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आसानी से बाजार में उपलब्ध होने वाली इन सब्जियों से होली में खेलने वाले रंग भी बनाए जाते हैं। वह अब केमिकल रंगों के बाजार को टक्कर देने में लगी हुई हैं। सब्जियों से बने रंगों की लगातार ही बढ़ रही मांग ने शिल्पी के इस हौसले को और बढ़ा दिया है। अब ये बाजारों में भी काफी डिमांड में हैं। इनमें केवल साग सब्जी का ही इस्तेमाल किया जाता है, जो कि हमारे घरों में आसानी से उपलब्ध रहता है। सब्जियों के रंग को निकालकर और गाढ़ा घोल तैयार करके सुखाकर बनाया जाता है।

 

‘केमिकल रंग ने डाला था प्रभाव, फिर जुगाड़ से निकाला निजात’

हर्बल गुलाल बनाने वाली शिल्पी श्रीवास्तव ने बताया कि एक समय में मुझे होली खेलने के दौरान किसी ने हार्मफुल और केमिकल युक्त रंग लगा दिया था। उसके बाद उनकी त्वचा संबंधी रोग में इजाफा हो गया, जिसके बाद उन्होंने इससे खुद को और लोगों को निजात दिलाने का प्रण ले लिया। उन्होंने बाजार में बिकने वाले इन कृत्रिम रंगों से लोगों को निजात दिलाने का ठान ली। शिल्पी ने बताया कि पहले खुद और परिवार के लिए हर्बल गुलाल तैयार किया। फिर अपने घर और रिश्तेदार के लिए तैयार किया था, जिसको खूब सराहा गया। इसके कारण होली के दौरान त्वचा पर पड़ने वाले किसी भी तरह के हानिकारक प्रभावों की जगह पर ही अब प्राकृतिक रंगों के बारे में काफी जागरूकता आई है और लोगों ने भी इसको खूब सराहा है।

 

‘पांच साल की प्रेरणा ने दी नई ऊंचाई को उड़ान’

शिल्पी बताती हैं कि वह पिछले पांच साल से होली के लिए सब्जियों से हर्बल रंग बना रही हैं। अब हर साल उन्हें बड़े पैमाने पर ऑर्डर भी मिलता है। पहले की अपेक्षा लोगों में इसको लेकर जागरूकता भी आई है। खासकर महिलाओं में इसको लेकर खूब मांग रहती है। इनको बनाने से लेकर बाजार में उपलब्ध कृत्रिम और हानिकारक प्रभाव डालने वाले रंग से निजात दिलाने का एक अनोखा प्रयोग है। लोग अब इसको खुद से तैयार कर सकते हैं और महज एक दिन में तैयार करने के बाद इसको इस्तेमाल में लाया जा सकता है। इसको लेकर अब पूरा परिवार इस कार्य के लिए सहयोग करता है। विशेष कर मां का इसको तैयार करने में सहयोग रहता है।

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