HP Assembly Budget Session: कटौती प्रस्ताव पर वोटिंग नहीं होने पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में हंगामा, नारेबाजी

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Ruckus between ruling party and opposition in the House, proceedings adjourned till Wednesday morning

हिमाचल प्रदेश विधानसभा शिमला
– फोटो : amar ujala

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विपक्ष की ओर से स्वास्थ्य सुविधाओं पर लाए गए कटौती प्रस्ताव पर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मंगलवार दोपहर बाद जमकर हंगामा और नारेबाजी हुई। मामले ने उस समय तूल पकड़ा, जब भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार ने कटौती प्रस्ताव पर डिविजन ऑफ वोट की मांग की। इस बीच राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने इसका विरोध किया। इसका विधायक परमार ने कड़े शब्दों में विरोध किया तो सत्ता पक्ष भी मुखर हो गया। इसको लेकर पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच नारेबाजी शुरू हो गई। इसी बीच विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सदन की कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी।

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि कटौती प्रस्ताव पर अगर ध्वनिमत से स्पष्टता नहीं आए तो नियम कहता है कि इस पर मतदान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब भगवान भी इस सरकार को नहीं बचा सकता है। कांग्रेस नेताओं के इस्तीफे होने शुरू हो गए हैं। उन्होंने कहा कि कटौती प्रस्ताव विपक्ष की ओर से लगाए जाते हैं। इसमें भाजपा विधायकों को बोलने का अधिकार होता है। इस पर राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि जब कटौती प्रस्ताव पर चर्चा हो रही थी, हां में हां हुई तो डिविजन का क्या मतलब। विधानसभा अध्यक्ष की ओर से इसमें रूलिंग दी गई है। इसके बाद भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार ने कहा कि धक्काशाही से सदन को आगे बढ़ाया जा रहा है। नियमों में प्रावधान है। हमने भी इस सीट से रूलिंग दी है।

बातों से कंफ्यूज किया जा रहा है। इसी बीच राजस्व मंत्री सीट पर खड़े होकर विरोध करने लगे। ऐसे में परमार ने कहा-आप कौन होते हैं। जिस तरह से कहा जा रहा है, ये लोकतंत्र की हत्या है। इसी बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच करीब दस मिनट हंगामा और नारेबाजी होती रही।

काेरम पूरा नहीं होने पर 2 बजे स्थगित हुआ सदन

भोजन अवकाश के बाद विधानसभा अध्यक्ष 2 बजे सदन में पहुंचे। इस बीच सदन में सत्ता और विपक्ष के विधायक मौजूद नहीं थे। विधानसभा अध्यक्ष ने कोरम पूरा होने तक सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। इसी बीच विपक्ष के विधायक एक साथ सदन में आए। ऐसे में विपक्ष की ओर से कहा गया कि सत्ता पक्ष के विधायक कहां हैं। विधानसभा अध्यक्ष भी नहीं हैं। बाद में सत्ता पक्ष के विधायक भी आ गए। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन में आकर कार्यवाही को शुरू किया।

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