HP High Court: चरस रखने के दोषी को 11 साल का कठोर कारावास

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

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– फोटो : अमर उजाला

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पांच किलोग्राम चरस रखने के दोषी को सुनाई गई सजा पर अपनी मुहर लगा दी है। चंबा निवासी अजय कुमार को निचली अदालत ने 11 साल के कठोर कारावास और एक लाख 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने निचली अदालत के निर्णय को सही ठहराया है। 7 अप्रैल, 2017 को चंबा पुलिस ने जसौरागढ़ पर नाका लगाया था। दोषी नकरोड की तरफ से गाड़ी में आ रहा था। चेकिंग करने पर पुलिस ने उसके थैले से पांच किलोग्राम चरस बरामद की। पुलिस ने मामले की प्रारंभिक जांच कर पुलिस ने मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम की धारा 20 के तहत प्राथमिकी दर्ज की।

मामले की जांच के बाद अभियोजन पक्ष ने दोषी के खिलाफ निचली अदालत में अभियोग चलाया। अभियोजन पक्ष ने दोषियों के खिलाफ अभियोग साबित करने के लिए 24 गवाह पेश किए। निचली अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष दोषी के खिलाफ अभियोग साबित करने में सफल रहा है। निचली अदालत ने दोषी को चरस रखने का दोषी पाते हुए 11 साल की कठोर कारावास और एक लाख दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस निर्णय को दोषी ने हाईकोर्ट के समक्ष अपील के माध्यम से चुनौती दी। हाई कोर्ट ने मामले से जुड़े तमाम रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि निचली अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए सुबूतों को सही तरीके से सराहा है। दोषी की अपील को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने निचली अदालत के निर्णय को सही ठहराया है। 

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पांच किलोग्राम चरस रखने के दोषी को सुनाई गई सजा पर अपनी मुहर लगा दी है। चंबा निवासी अजय कुमार को निचली अदालत ने 11 साल के कठोर कारावास और एक लाख 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने निचली अदालत के निर्णय को सही ठहराया है। 7 अप्रैल, 2017 को चंबा पुलिस ने जसौरागढ़ पर नाका लगाया था। दोषी नकरोड की तरफ से गाड़ी में आ रहा था। चेकिंग करने पर पुलिस ने उसके थैले से पांच किलोग्राम चरस बरामद की। पुलिस ने मामले की प्रारंभिक जांच कर पुलिस ने मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम की धारा 20 के तहत प्राथमिकी दर्ज की।

मामले की जांच के बाद अभियोजन पक्ष ने दोषी के खिलाफ निचली अदालत में अभियोग चलाया। अभियोजन पक्ष ने दोषियों के खिलाफ अभियोग साबित करने के लिए 24 गवाह पेश किए। निचली अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष दोषी के खिलाफ अभियोग साबित करने में सफल रहा है। निचली अदालत ने दोषी को चरस रखने का दोषी पाते हुए 11 साल की कठोर कारावास और एक लाख दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस निर्णय को दोषी ने हाईकोर्ट के समक्ष अपील के माध्यम से चुनौती दी। हाई कोर्ट ने मामले से जुड़े तमाम रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि निचली अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए सुबूतों को सही तरीके से सराहा है। दोषी की अपील को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने निचली अदालत के निर्णय को सही ठहराया है। 



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