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पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज
– फोटो : अमर उजाला
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पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि शिमला के विधायक हरीश जनारथा भाजपा सरकार के दौरान किए गए कार्यों का श्रेय लेने का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस विधायक को शिमला में चले कार्यों में तेजी लानी चाहिए न कि कार्यों में बाधाएं उत्पन्न करें। कांग्रेस विधायक इन दिनों भाजपा सरकार के दौरान शिमला शहर में हुए विकास कार्यों का खूब प्रचार कर रहे हैं। सुरेश भारद्वाज ने कांग्रेस की अंतर्कलह पर चुटकी लेते हुए कहा की 5 गांव तो महाभारत में पांडवों ने कौरवों से मांगे थे, राजेंद्र राणा या कांग्रेस ने नेता बताए कि कांग्रेस सरकार का दुर्योधन कौन है?
उन्होंने कहा कि शहर की 156 करोड की पानी की स्कीम वापस चली गई है। शिमला 2014 में केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनी केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू थे। शिमला को अमृत मिशन प्राप्त हुआ। इस प्रोजेक्ट के तहत अनेकों नालों और ओवरहेड ब्रिज पर काम हुआ। शिमला को स्मार्ट सिटी का दर्जा मिलना था। उस समय प्रदेश में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और सुधीर शर्मा शहरी विकास मंत्री थे। उस समय शिमला को 87 अंक प्राप्त हुए थे।
लेकिन फर्जीवाड़े के चलते धर्मशाला को स्मार्ट सिटी का दर्जा दिया गया, भाजपा ने विरोध किया और केंद्र तक लड़ाई लड़ी उसके उपरांत शिमला को भी स्मार्ट सिटी का दर्जा मिला। अंग्रेजों के समय से शिमला शहर में जो कार्य नहीं हो पाए वह भाजपा के कार्यकाल में हुए। ढली टनल के साथ 54 करोड़ से एक और सुरंग का निर्माण हुआ। जब इस टनल के दोनों छोर मिले थे तब मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर थे। अगर पानी की कमी की बात करें तो कांग्रेस की सरकार में शिमला की जनता को पानी न मिलने का रिकॉर्ड बना है।
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उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के समय विक्ट्री टनल और विधानसभा के बीच कालोनी में फ्लाईओवर का टेंडर हो चुका है। भाजपा ने लड़ाई लड़ी और स्मार्ट सिटी के तहत 90 अनुपात 10 की रेश्यो में हिमाचल प्रदेश को कंसेशन प्राप्त हुआ।
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