Jammu Kashmir: रिश्तेदारी को ढाल बना रहा पाकिस्तान, फैला रहा नारको आतंकवाद का नेटवर्क

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नशे की खेप और हथियार बरामद

नशे की खेप और हथियार बरामद
– फोटो : फाइल

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जम्मू कश्मीर की एलओसी के पास 150 ऐसे गांव हैं, जो तारबंदी के आगे हैं। इन गांवों में रहने वाले लोगों की रिश्तेदारी पाकिस्तान में है। इस रिश्तेदारी को ढाल बनाकर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और आतंकी संगठन जम्मू-कश्मीर में नारको आतंकवाद और आतंकवाद का नेटवर्क चला रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने कई ऐसे लोगों को दबोचा हैं, जो एलओसी के पास रहते हैं, जिनके रिश्तेदार पीओजेके में हैं और यह नारको आतंकवाद और नशे की तस्करी में संलिप्त हैं। ये गांव सरहद पर उस जगह हैं। जहां इस पार से उस पार अवैध रूप से जाना लगा हुआ है। चंद मिनट में इधर से उधर लोग चले जाते हैं। हालांकि इन पर नजर रखने के लिए बीएसएफ और सेना है, लेकिन कई ऐसी जगह हैं, जहां से इस पार से उस पार यह लोग चलते जाते हैं। 

कैसे हो रहा इस्तेमाल
सूत्रों का कहना है कि इन गांवों में मौजूद लोगों के जो रिश्तेदार पाकिस्तान में हैं। आतंकी संगठन इनसे संपर्क कर रहे हैं। फिर इनके जरिए उक्त गांव में रहने वाले लोगों से संपर्क कर रहे हैं। इसके बाद इनके जरिए नारको आतंकवाद का नेटवर्क चला रहे हैं। 

केस 1
नाम है मोमीन मीर। कुपवाड़ा की एलओसी के नजदीक गांव का रहने वाला है। मामा पाकिस्तान में है। 11 जून 2021 को गिरफ्तार किया गया था। 100 करोड़ की हेरोइन बरामद हुई थी। पूछताछ में पता चला कि पाकिस्तान जाने पर उसके मामा के जरिए लश्कर ए ताइबा के आतंकियों ने संपर्क किया। वह हेरोइन की तस्करी में शामिल हो गया। उसके मामा ने आतंकियों के लिए काम करने को कहा।

केस 2
 राजोरी के झंगड़ एलओसी की रहने वाली रुखसाना 3 करोड़ की हेरोइन के साथ जम्मू के गांधी नगर में नवंबर 2022 में गिरफ्तार हुई। पूछताछ में पता चला कि इसके रिश्तेदार पीओके में हैं। वह पाकिस्तान में बैठे नशा तस्करी के हैंडलर के संपर्क में भी थी।

केस 3
अभी 6 दिन पहले ही पुंछ के मेंढर एलओसी से सटे गांव से दो सगी नाबालिग बहनें 4 करोड़ की हेरोइन के साथ गिरफ्तार हुईं। इनके मामा भी पीओके के कोटली में हैं। माना जा रहा है कि इनके मामा का इस हेरोइन की तस्करी में हाथ है। हालांकि इसकी अभी कोई पुष्टि नहीं हुई है।  

पीओके में नारको आतंकवाद के तीन समूह 

सूत्रों का कहना है कि नशा तस्करी के लिए पाकिस्तानी सेना और आईएसआई ने तीन समूह बनाए हैं। इनमें मनशेरा, मुजफ्फराबाद और कोटली शामिल हैं। इन तीनों जगहों पर आतंकी संगठन लश्कर ए ताइबा, जैश ए मोहम्मद, अल बदर और हरकत उल मुजाहिद्दीन के शिविर हैं। 

मनशेरा समूह के बोई, बालाकोट और गड़ी हबीबुल्लाह में शिविर हैं। मुजफ्फराबाद समूह के चेलाबंदी, शेवनाला, अब्दुल्लाबिन मसूद और दुलाई में शिविर हैं, जबकि कोटली के सेंसा, गूलपुर, फागोश और डुबगी में शिविर हैं। इन जगहों पर पाकिस्तानी सेना और आईएसआई मिलकर हेरोइन की तस्करी करवा रही है।

जानकारी के अनुसार कुपवाड़ा, बारामुला, राजोरी और पुंछ जिलों के 150 से अधिक ऐसे गांव हैं, जो एलओसी से बिल्कुल पास लगते हैं। पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठन इन गांवों में मौजूद उन लोगों की मदद ले रहे हैं, जिनके रिश्तेदार पाकिस्तान और पीओजेके के अलग-अलग गांवों में रहते हैं। इन लोगों की पहचान करके फिर इनसे ओजी वर्करों के जरिए संपर्क किया जा रहा है।

यही नहीं, पाकिस्तान जाने वाले कश्मीर के लोगों पर भी आतंकी संगठनों की नजर रहती है। जैसे ही कश्मीर का कोई शख्स पाकिस्तान जाए तो उससे बात की जाती है कि वह उनके लिए काम करे। हेरोइन की सप्लाई भेजने के लिए सबसे ज्यादा नालों का इस्तेमाल किया जा रहा है, क्योंकि इन नालों में कोई तारबंदी नहीं है। 

उस पार जाकर लाई जा रही हेरोइन
एलओसी से सटे गांव के लोगों को पीओजेके के उस पार के इलाकों की काफी जानकारी है। ऐसे में आतंकी संगठन पीओजेके की तरफ एक जगह पर हेरोइन की खेप छुपाकर रख देते हैं। इसके बाद इस तरफ के गांव में बैठे हैंडलर को उक्त जगह के बारे बता दिया जाता है। वह उस पार जाकर हेरोइन लाता है और इसे आगे सप्लाई कर देता है।

विस्तार

जम्मू कश्मीर की एलओसी के पास 150 ऐसे गांव हैं, जो तारबंदी के आगे हैं। इन गांवों में रहने वाले लोगों की रिश्तेदारी पाकिस्तान में है। इस रिश्तेदारी को ढाल बनाकर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और आतंकी संगठन जम्मू-कश्मीर में नारको आतंकवाद और आतंकवाद का नेटवर्क चला रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने कई ऐसे लोगों को दबोचा हैं, जो एलओसी के पास रहते हैं, जिनके रिश्तेदार पीओजेके में हैं और यह नारको आतंकवाद और नशे की तस्करी में संलिप्त हैं। ये गांव सरहद पर उस जगह हैं। जहां इस पार से उस पार अवैध रूप से जाना लगा हुआ है। चंद मिनट में इधर से उधर लोग चले जाते हैं। हालांकि इन पर नजर रखने के लिए बीएसएफ और सेना है, लेकिन कई ऐसी जगह हैं, जहां से इस पार से उस पार यह लोग चलते जाते हैं। 

कैसे हो रहा इस्तेमाल

सूत्रों का कहना है कि इन गांवों में मौजूद लोगों के जो रिश्तेदार पाकिस्तान में हैं। आतंकी संगठन इनसे संपर्क कर रहे हैं। फिर इनके जरिए उक्त गांव में रहने वाले लोगों से संपर्क कर रहे हैं। इसके बाद इनके जरिए नारको आतंकवाद का नेटवर्क चला रहे हैं। 

केस 1

नाम है मोमीन मीर। कुपवाड़ा की एलओसी के नजदीक गांव का रहने वाला है। मामा पाकिस्तान में है। 11 जून 2021 को गिरफ्तार किया गया था। 100 करोड़ की हेरोइन बरामद हुई थी। पूछताछ में पता चला कि पाकिस्तान जाने पर उसके मामा के जरिए लश्कर ए ताइबा के आतंकियों ने संपर्क किया। वह हेरोइन की तस्करी में शामिल हो गया। उसके मामा ने आतंकियों के लिए काम करने को कहा।

केस 2

 राजोरी के झंगड़ एलओसी की रहने वाली रुखसाना 3 करोड़ की हेरोइन के साथ जम्मू के गांधी नगर में नवंबर 2022 में गिरफ्तार हुई। पूछताछ में पता चला कि इसके रिश्तेदार पीओके में हैं। वह पाकिस्तान में बैठे नशा तस्करी के हैंडलर के संपर्क में भी थी।

केस 3

अभी 6 दिन पहले ही पुंछ के मेंढर एलओसी से सटे गांव से दो सगी नाबालिग बहनें 4 करोड़ की हेरोइन के साथ गिरफ्तार हुईं। इनके मामा भी पीओके के कोटली में हैं। माना जा रहा है कि इनके मामा का इस हेरोइन की तस्करी में हाथ है। हालांकि इसकी अभी कोई पुष्टि नहीं हुई है।  

पीओके में नारको आतंकवाद के तीन समूह 

सूत्रों का कहना है कि नशा तस्करी के लिए पाकिस्तानी सेना और आईएसआई ने तीन समूह बनाए हैं। इनमें मनशेरा, मुजफ्फराबाद और कोटली शामिल हैं। इन तीनों जगहों पर आतंकी संगठन लश्कर ए ताइबा, जैश ए मोहम्मद, अल बदर और हरकत उल मुजाहिद्दीन के शिविर हैं। 

मनशेरा समूह के बोई, बालाकोट और गड़ी हबीबुल्लाह में शिविर हैं। मुजफ्फराबाद समूह के चेलाबंदी, शेवनाला, अब्दुल्लाबिन मसूद और दुलाई में शिविर हैं, जबकि कोटली के सेंसा, गूलपुर, फागोश और डुबगी में शिविर हैं। इन जगहों पर पाकिस्तानी सेना और आईएसआई मिलकर हेरोइन की तस्करी करवा रही है।

जानकारी के अनुसार कुपवाड़ा, बारामुला, राजोरी और पुंछ जिलों के 150 से अधिक ऐसे गांव हैं, जो एलओसी से बिल्कुल पास लगते हैं। पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठन इन गांवों में मौजूद उन लोगों की मदद ले रहे हैं, जिनके रिश्तेदार पाकिस्तान और पीओजेके के अलग-अलग गांवों में रहते हैं। इन लोगों की पहचान करके फिर इनसे ओजी वर्करों के जरिए संपर्क किया जा रहा है।

यही नहीं, पाकिस्तान जाने वाले कश्मीर के लोगों पर भी आतंकी संगठनों की नजर रहती है। जैसे ही कश्मीर का कोई शख्स पाकिस्तान जाए तो उससे बात की जाती है कि वह उनके लिए काम करे। हेरोइन की सप्लाई भेजने के लिए सबसे ज्यादा नालों का इस्तेमाल किया जा रहा है, क्योंकि इन नालों में कोई तारबंदी नहीं है। 

उस पार जाकर लाई जा रही हेरोइन

एलओसी से सटे गांव के लोगों को पीओजेके के उस पार के इलाकों की काफी जानकारी है। ऐसे में आतंकी संगठन पीओजेके की तरफ एक जगह पर हेरोइन की खेप छुपाकर रख देते हैं। इसके बाद इस तरफ के गांव में बैठे हैंडलर को उक्त जगह के बारे बता दिया जाता है। वह उस पार जाकर हेरोइन लाता है और इसे आगे सप्लाई कर देता है।



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