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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी। (फाइल)
– फोटो : अमर उजाला।
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी छह सितंबर को मनाई जाएगी। इस बार का पर्व श्रद्धालुओं के लिए खास होने वाला है। 30 वर्ष बाद इस बार जन्माष्टमी पर अत्यंत पुण्यदायी जयंती योग बन रहा है। इस योग में पूजन-अर्चन से श्रद्धालुओं को पापों से मुक्ति मिलेगी, वहीं पुण्य में वृद्धि होगी।
वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण सप्तमी तिथि का मान शाम सात बजकर 58 मिनट तक पश्चात अष्टमी है। इस दिन कृत्तिका नक्षत्र भी दिन में दो बजकर 39 मिनट तक पश्चात रोहिणी नक्षत्र संपूर्ण रात्रि है। हर्षण योग सुबह चार बजकर 10 मिनट तक, इसके बाद सिद्धि नामक औदायिक योग है।
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी के समय अर्ध रात्रि में हुआ था। इस वर्ष अष्टमी, बुधवार और रोहिणी नक्षत्र का योग होने से जयंती नामक योग बन रहा है, जो महा पुण्यदायक माना गया है।
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