[ad_1]

जोशीमठ भू-धंसाव
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उत्तराखंड में अधिकतर शहर और गांव पहाड़ी से हुए भूस्खलन से आए मलबे के ऊपर बसे हुए हैं। अंधाधुंध, अनियोजित और अनियंत्रित निर्माण से शहर खतरे की जद में हैं। दबाव बढ़ने, पानी की निकासी न होने या जमीन के अंदर हलचल होने से भू-धंसाव और भूस्खलन जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।
यह कहना है गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के भूविज्ञानियों का। भूविज्ञानियों का कहना है कि किसी भी क्षेत्र में बसावट से पूर्व धारण क्षमता (लोड बियेरिंग कैपेसिटी) के अध्ययन के साथ ही निर्माण नीतियों का पालन किया जाना चाहिए। भू आकृति की दृष्टि से भूविज्ञानी गोपेश्वर, टिहरी, भटवाड़ी, देवप्रयाग, पौड़ी, कर्णप्रयाग व श्रीनगर जैसे शहरों में भारी बसावट को सही नहीं मान रहे हैं। इन शहरों का काफी हिस्सा मलबे के ऊपर बसा है।
गढ़वाल विवि के भूविज्ञानी प्रो. यशपाल सुंद्रियाल का कहना है कि पहाड़ मेें कभी भूस्खलन हुआ होगा तो लोगों ने जहां हल्का भी समतल देखा वहां बस्ती बसा दी। ढलान पर बसे इन शहरों के नीचे से नदी गुजर रही है। वहीं, श्रीनगर ऐसा शहर है जो नदी में बहकर आए हुए मलबे में बसा है। अनियोजित निर्माण और दबाव की वजह से यह शहर खतरे की जद में है।
[ad_2]
Source link