Maha Shivratri 2024: इस मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं शिव, महाभारत काल से जुड़ा है इतिहास

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Maha Shivratri 2024 Shiva is present in form of Swayambhu Shivalinga in Prithvinath Mahadev Temple Know histor

पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर
– फोटो : अमर उजाला

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दून का पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर महाभारत काल से ही भक्तों की आस्था का केंद्र है। मंदिर में भगवान शिव स्वयंभू शिवलिंग के रूप में विराजमान है। उनके साथ मां पार्वती शक्ति स्वयंभू पिंडी के रूप में स्थापित हैं। मान्यता है कि मंदिर में सच्चे मन से आराधना करने पर मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

श्रीपृथ्वीनाथ महादेव मंदिर सहारनपुर चौक के पास अवस्थित है। यहां वैश्य वर्णोत्पन्न वामन नामक संन्यासी की तपस्या पर भगवान शिव का स्वयं प्रकट होकर शिवलिंग के रूप में अवस्थित हैं। इसका वर्णन स्कंद पुराण के केदारखंड में है। माना जाता है कि गुरु द्रोणाचार्य ने इस मंदिर में तपस्या की थी। मंदिर का संचालन पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी करता है। मंदिर में श्री त्रयंबकेश्वर महादेव के दर्शन तीन स्वरूपों में होते हैं। इनमें दो स्वरूप लिंग, पिंडी के रूप में प्रत्यक्ष जबकि एक स्वरूप अलोप है जो जल में होना बताया जाता है।

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मान्यता है कि मंदिर में भगवान सच्चे मन से पूजा करने पर जीवन में दुख दूर होते हैं। श्रीपंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव 108 महंत रविंद्र पुरी महाराज बताते हैं कि श्रीपृथ्वीनाथ महादेव के दर्शन और पूजन की महिमा भगवान शिव ने की है। स्वयं भगवान शिव ने कहा कि यहां पृथ्वीश्वर यानी पृथ्वीनाथ नाम का शिवलिंग होगा। मंदिर के संजय गर्ग बताते हैं कि यहां जो भी शिवभक्त सच्चे मन से आता है उसकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मंदिर में हनुमानजी, राधा-कृष्ण, मां भगवती, भैरव बाबा के साथ 15 से अधिक भगवानों की प्रतिमाएं हैं।

200 वर्ष पुराने बेल के पेड़ पर सालभर आते हैं फल

पृथ्वीनाथ महोदव मंदिर में करीब 200 साल पुराने दो बेल के पेड़ हैं। खास बात है कि इनपर सालभर फल आते हैं। इसके साथ ही मंदिर में सैकड़ों वर्ष पुराना एक पीपल का वृक्ष है।

खोदाई में मिला था चिमटा और हवन कुंड

सेवादार संजय गर्ग बताते हैं कि मंदिर में करीब 20 साल पहले खोदाई हुई थी। इसमें एक चिमटा और एक बड़ा हवन कुंड मिला था जिसे लोग महाभारत काल से जुड़ा मानते हैं।

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