Maharashtra: टूटकर भी उद्धव ठाकरे की शिवसेना क्यों मान रही कि वह एक साल बाद ‘जीत’ गई!

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In this political crisis of Maharashtra, why Shiv Sena is seeing big victory

Maharashtra Crisis
– फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

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महाराष्ट्र में रविवार को हुए सियासी उठापटक को शिवसेना अपनी एक ‘बड़ी जीत’ के तौर पर देख रही है। हालांकि शिवसेना की यह ‘जीत’ सत्ता में तुरंत वापसी की किसी उम्मीद को लेकर नहीं है, लेकिन शिवसेना अपनी पार्टी से टूट कर गए बागी नेता एकनाथ शिंदे की भाजपा में पड़ रही कमजोर पकड़ को अपनी जीत के तौर पर देख रही है। एनसीपी के नेता अजित पवार के भाजपा वाली सरकार में शामिल होने पर शिवसेना के नेता और पार्टी के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी इस बात को लेकर अब समूचे महाराष्ट्र में अभियान चलाकर माहौल भी बना रहे हैं कि एकनाथ शिंदे के लिए अब सरकार बनाए रखने की मजबूरी नहीं है। इस सियासत पर बाकायदा शिवसेना के नेता उद्धव ठाकरे ने जल्द ही अजित पवार को मुख्यमंत्री बनाए जाने की बात कहकर नया सियासी तूल दे दिया है।

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अजित पवार के आने से एकनाथ शिंदे नहीं होंगे अब मजबूरी

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना के विधायकों को अपने साथ जोड़ कर एकनाथ शिंदे ने भाजपा के साथ मिलकर पिछले साल सरकार बनाई थी। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस सियासी हलचल से उद्धव ठाकरे की शिवसेना को राजनीतिक तौर पर बहुत बड़ा नुकसान हुआ था। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक दयानंद भिड़े कहते हैं कि ठीक एक साल बाद महाराष्ट्र में एक बार फिर से उसी तरीके की सियासी उठापटक फिर से रविवार को हुई। इस सियासी उठापटक में भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाए रखने वाले एकनाथ शिंदे रविवार की घटना के साथ सियासी तौर पर कमजोर तो हुए ही हैं। इसके पीछे वह तर्क देते हैं कि भाजपा की सरकार राज्य में बनी रहे इसके लिए एकनाथ शिंदे भाजपा की एक तरह से मजबूरी थे। लेकिन अब अजित पवार के आने से यह परिस्थितियां पूरी तरह से बदल गई हैं। यही वजह है कि शिवसेना एकनाथ शिंदे के कमजोर होने को अपनी ताकत के तौर पर देख रही है।





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