[ad_1]

मंडी महाशिवरात्रि महोत्सव का शुभारंभ।
– फोटो : संवाद
विस्तार
रियासतकालीन राज देवता माधोराय की अगुवाई में शनिवार को अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव की पहली शाही जलेब भव्य अंदाज में निकली। इसी के साथ महाशिवरात्रि महोत्सव का शुभारंभ हो गया। इससे पहले मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंडी के अराध्य देव बाबा भूतनाथ और राज देवता माधोराय की पूजा-अर्चना कर परंपरा निभाई और जलेब को रवाना किया। खुद भी खुली जीप में सवार होकर जलेब में शामिल हुए। इस दौरान गण्यमान्य लोगों, प्रशासन के अधिकारियों, देवता समिति के पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने रंग-बिरंगी पगड़ियां पहन जलेब की शोभा बढ़ाई। जलेब में परंपरा के अनुसार राज देवता माधोराय की पालकी के आगे 21 देवी-देवता और पीछे से छह देवी-देवताओं के रथ चले। सैकड़ों देवलुओं ने देवी-देवताओं ने रथों के साथ शिरकत की।
इस मौके पर पारंपरिक वाद्य यंत्रों, ढोल-नगाड़ों और नरसिंगों की धुनों से छोटी काशी गूंज उठी। देवी-देवताओं के रथों के साथ नाटी डालते देवलुओं को देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया। यह जलेब डीसी कार्यालय से शुरू होकर ऐतिहासिक पड्डल मैदान में पहुंची। यहां पर यहां सीएम ने ध्वजारोहण कर सात दिवसीय महोत्सव का विधिवत शुभारंभ किया। जलेब में सबसे आगे एक बड़ा ढोल, उसके बाद पहाड़ी नाटी डालते हुई महिलाओं का दल, इस्कॉन संस्था का दल, ब्रह्मकुमारियों की झांकी, पुलिस के घुड़सवार, पुलिस जवानों, होमगार्ड बैंड मार्च का पास्ट करते हुए चले।
इस तरह से रहा जलेब में देवी देवताओं का प्रोटोकाॅल
राज देवता माधोराय के दरबार से जलेब दोपहर बाद करीब 3:00 बजे शुरू हुई। जलेब में सबसे पहले माधोराय से आगे 21 देवी-देवता रहे। इनमें देवता छानणू-छमाहूं, मार्कंडेय सराज, देव विष्णु मतलोड़ा, देवी अंबिका, शैटी नाग, मगरू महादेव, लक्ष्मी नारायण, बिठ्ठू नारायण, ब्रह्मदेव तुंगासी महामाया, देव चुंजुवाला, देवी नाऊ की अंबिका, देव नाग चपलांदू, गढ़पति तुगांसी, देव चपलांदू, आदि शक्ति महामाया, देव पशाकोट, देव हुरंग नायायण, घटौणी नारायण, देव पेखरा गहरी, बायला नारायण, देवी भैरवा के देव रथ रहे। इनके पीछे ऋषि सुखदेव, श्री देवता डगांडू, आदि गणपति, देव झाथीवीर, देव श्री टुंडीवीर और देव श्री शेषनाग चले। जलेब करीब साढ़े पांच बजे पड्डल मैदान पहुंची, जहां सीएम ने अपना संबोधन दिया।
[ad_2]
Source link