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– फोटो : सोशल मीडिया
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उत्तर प्रदेश के एटा में एक ओर वैष्णों देवी यात्रा के लिए घर में तैयारियां चल रहीं थीं, तो दूसरी ओर होनहार बेटी नीट की परीक्षा के लिए जी जान से जुटी थी। परिजन उसे चिकित्सक बनते देखना चाहते थे, लेकिन एक झटके में उनके सपने उजड़ गए और तैयारियां धरी रह गईं। न जाने क्या हुआ कि किसी से बिना कुछ कहे-सुने बेटी ने मौत को गले लगा लिया। सोमवार शाम को हुए पोस्टमार्टम में भी मौत की वजह फंदे पर लटकना बताई गई है।
शहर के मोहल्ला सिविल लाइंस में रहने वाले अनिल कुमार की 19 वर्षीय बेटी खुशी ने सोमवार सुबह करीब 6 बजे अपने घर के कमरे में दुपट्टे से फंदा लगा लिया था। 2022 में राजस्थान के कोटा में मां के साथ रहकर नीट की तैयारी की थी। 2023 में परीक्षा भी दी। 700 में से 505 अंक आए थे। वह प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में प्रवेश नहीं लेना चाहती थी। इसलिए अगले एग्जाम में प्रयास का मन बनाया और फिर तैयारी में जुट गई। इस बार घर में ऑनलाइन क्लास के जरिए पढ़ रही थी। पांच मई को परीक्षा होनी थी।
खुशी के बाबा सेवानिवृत्त स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी दिवारीलाल ने बताया कि अपने नाम के अनुसार ही खुशी का व्यवहार भी था। बेटा अपने परिवार के साथ अलग घर में रहता है। मैं जब भी वहां जाता तो सबसे पहले कॉफी लेकर वही आती थी। सोमवार को जब फोन पर सूचना मिली तो मेरे पैरों तले जमीन ही खिसक गई। वहां गया तो बिटिया निढाल पड़ी थी।
घूमने की शौकीन थी बेटी
बताया कि 12 अप्रैल को जन्मदिन आ रहा था, लेकिन नवरात्रि की वजह से कह दिया था कि कुछ खास नहीं करेंगे। घूमने की शौकीन थी। फरवरी में अपने माता-पिता के साथ मेघालय, दार्जिलिंग आदि जगह घूमकर आई थी। 19 अप्रैल को वैष्णों देवी के लिए सभी का रिजर्वेशन कराया था। इसके लिए घर में तैयारियां की जा रहीं थीं।
कुछ होता तो अपने पिता को जरूर बताती
बताया कि बेटी बहुत बहादुर थी, कुछ भी आभास न था कि ऐसा कदम उठा सकती है। किसी तरह की समस्या, शिकायत, पढ़ाई का दबाव आदि को लेकर कुछ भी नहीं कहा। जबकि रोज ही पिता से एक दोस्त की तरह उसकी बात होती थी। अगर कुछ होता तो अपने पिता को जरूर बताती। सोमवार की सुबह भी सबसे हंस-बोलकर बातचीत हुई। समझ में नहीं आता कि अचानक ऐसा क्या हुआ जो उसने इतना बड़ा कदम उठा लिया।
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