Uttarakhand: 2024 तक प्रदेश की जेलों पर कम होगा बंदियों का भार, क्षमता से करीब 185% ज्यादा कैदी हैं बंद

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जेल
– फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

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उत्तराखंड की जेलों में कैदियों का भार आने वाले साल में कम होने की उम्मीद है। वर्तमान में जेलों में क्षमता से करीब 185 फीसदी अधिक कैदी बंद हैं। इस भार को कम करने के लिए दो नई जेलों रुद्रपुर (किच्छा) और पिथौरागढ़ का निर्माण अंतिम चरण में है। जबकि, चंपावत जेल निर्माण के लिए जमीन फाइनल हो चुकी है। 2024 के मध्य तक दो जेलों में अन्य जेलों से निकालकर कैदियों को रखा जा सकेगा। तीनों नई जेलों की कुल क्षमता 3000 से अधिक होगी।

वर्तमान में उत्तराखंड में एक सेंट्रल और एक खुली जेल समेत कुल 11 जेल हैं। इनकी कुल क्षमता 3740 बंदियों को रखने की है, लेकिन इन जेलों में 7000 से अधिक कैदी बंद हैं। इनमें ज्यादातर संख्या विचाराधीन कैदियों की है। सबसे अधिक बंदियों वाली जेलों की बात करें तो रुड़की, हल्द्वानी और देहरादून का नाम है। यहां पर दो से तीन गुना तक अधिक कैदी बंद हैं। बीते वर्षों में जेलों में बंदियों का भार कम करने के लिए रुद्रपुर में, चंपावत और पिथौरागढ़ में जिला जेल बनाने को मंजूरी मिली थी।

इनमें से सबसे बड़ी जेल रुद्रपुर में बनने जा रही है। इसकी क्षमता 2500 बंदियों की है। इस जेल का निर्माण 2024 के मध्य तक पूरा हो जाएगा। डीआईजी जेल धधिराम मौर्य ने बताया कि शुरुआती फेज में इसमें 480 कैदियों के लिए बैरक बनाई जा रही है। धीरे-धीरे इसकी क्षमता को बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही पिथौरागढ़ जेल में 100 बंदियों को रखने की क्षमता होगी। इसका निर्माण भी जल्द पूरा होने वाला है। जबकि, चंपावत जिला जेल के लिए जमीन का चिन्हीकरण हो चुका है। यहां भी निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। इसके अलावा हल्द्वानी जेल में भी बैरकों का निर्माण किया जा रहा है।

ये हैं सबसे ज्यादा बंदियों वाली जेल

जेल-        क्षमता   कैदियों की संख्या

देहरादून-   580       1420

रुड़की-      244        567

हल्द्वानी- 535        1600

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