Varanasi: हनुमान घाट से केदार घाट के बीच बसता है मिनी तमिलनाडु, गलियां-मंदिर और घर कराते हैं तमिल का एहसास

[ad_1]

विस्तार


डेढ़ सौ साल हो गए लेकिन हमारे अंदर तमिलनाडु धड़कता है। इतना लंबा अंतराल बीतने के बाद भी तमिलनाडु से जड़ें जुड़ी हुईं हैं। घर में तमिल परंपराएं निभाई जाती हैं तो शादी-विवाह अब भी वहीं होते हैं। काशी में रहते-रहते अब तो काशी और तमिलनाडु का अंतर भी महसूस नहीं होता। हनुमान घाट से केदार घाट के बीच मिनी तमिलनाडु बसता है। यह कहना है हनुमान घाट निवासी पद्मश्री गणेश का।

काशी प्रकाश का तो कांची ज्ञान का केंद्र है। काशी से तमिल का रिश्ता सदियों पुराना है। हनुमान घाट, केदारघाट, चेतसिंह घाट और मानसरोवर पर दक्षिण भारतीय समुदाय की बड़ी आबादी रहती है। आंकड़ों के अनुसार इनकी जनसंख्या लगभग पांच हजार से अधिक है। केदारघाट से हनुमान घाट के बीच रहने वाले घनपाठी हैं और चारों वेदों का नियमित पाठ करने वाले हैं। जैसे ही आप हरिश्चंद्र घाट पर तमिल मोहल्ले में पहुंचेंगे होटल तमिलनाडु, तिरुपति बालाजी मंदिर, मद्रास कैफे आदि के नाम से कई रेस्टोरेंट भी मिल जाएंगे। गलियों की हर दीवार तमिल का अहसास कराती हैं। मंदिरों और घरों के नाम व नेमप्लेट हिंदी के साथ-साथ तमिल में भी लिखे मिल जाएंगे।

शंकराचार्य के काशी आने के बाद अनवरत जारी है सिलसिला

कांची शंकराचार्य मठ के प्रभारी वीएस सुब्रमण्यम मणि का कहना है कि आदि शंकराचार्य के समय से ही शैव तमिलों का काशी आने का सिलसिला शुरू हो गया। उनका परिवार भी 1876 में तमिलनाडु के तिरुनवेल्ली से व्यवसाय के लिए आया था। बाबा विश्वनाथ, माता विशालाक्षी और मां गंगा हजारों साल से तमिलों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र हैं। आदि शंकराचार्य के काशी आने और अद्वैत उपदेश देने के बाद तमिल संतों का भी काशी आगमन हुआ। आदिशंकराचार्य के बाद कुमारगुरुपरार ने कुमारस्वामी मठ की स्थापना काशी में की। उन्होंने मुगल राजकुमार दाराशिकोह से जमीन मांगी थी और 16वीं सदी में इसे स्थापित किया। यह मठ केदारघाट पर केदारेश्वर मंदिर का प्रबंधन भी देखता है। इसके अलावा शंकराचार्य चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती और शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती का भी आगमन हो चुका है। कांची शंकराचार्य मठ की शाखा के साथ ही नाटकोट्टम क्षत्रम की भी स्थापना हुई।

हर परिवार में है एक मंदिर

काशी में रहने वाले हर तमिल परिवार का एक शिवालय (शिव मंदिर) है और इनकी संख्या डेढ़ सौ से अधिक है। गणेश रामसेसन ने बताया कि तमिल समुदाय के हजारों लोग हर साल काशी की यात्रा के लिए आते हैं। इनमें से कुछ काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन के लिए आते हैं और कुछ अपने माता-पिता की मृत्यु के बाद की रस्मों को निभाने आते हैं।

तमिलनाडु की धरोहर है महाकवि का आवास

तमिलनाडु के महाकवि सुब्रमण्यम भारती का आवास काशी में धरोहर के रूप में संरक्षित है। तमिलनाडु से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह आस्था का केंद्र भी है। महाकवि ने हनुमान घाट पर लंबा समय बिताया था। हरिश्चंद्र घाट पर कांची कामकोटि मंदिर काशी में तमिलनाडु का अहसास कराता है।

गोस्वामी ने स्थापित किया है हनुमान मंदिर

गोस्वामी तुलसीदास ने हनुमान घाट पर ही हनुमान जी का विग्रह स्थापित किया था। इसी के नाम पर इस घाट का नाम हनुमान घाट पड़ गया। महाप्रभु वल्लभचार्य की तीसरी बैठक भी हनुमान घाट पर हुई जहां वह लंबे समय तक रहे। मान्यता है कि एक दिन उन्होंने गंगा में गोता लगाया और आसमान से उतरे तेज पुंज में विलीन हो गए।

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *