घोसी उपचुनाव: सपा के लिए सीट बरकरार रखने की चुनौती, BJP के लिए प्रतिष्ठा का विषय, क्या कहते हैं सियासी समीकरण?

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Ghosi By Election 2023 challenge of retaining seat for SP while issue of prestige for BJP

सुधाकर सिंह और दारा सिंह चौहान
– फोटो : सोशल मीडिया

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उत्तर प्रदेश के मऊ जिले की घोसी विधानसभा सीट इन दिनों चर्चा में है। विधानसभा चुनाव 2022 को बमुश्किल एक साल से अधिक समय बीता नहीं था कि इसी सीट पर अब पांच सितंबर को उपचुनाव होने जा रहा है। यह चुनाव इस लिए भी खास होने जा रहा है कि यहां से 2022 में चुनाव जीत चुके दारा सिंह चौहान इस बार भाजपा से मैदान में हैं। 2022 में उन्होंने इसी सीट से सपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी। अब यह भविष्य तय करेगा कि क्या दारा सिंह चौहान इसी सीट से दोबारा अपनी जीत कायम रख पाएंगे या जनता उन्हें नकार देगी।

सपा ने पूर्व विधायक सुधाकर सिंह पर दांव खेला है। कहा जाता है कि 2022 के चुनाव में भाजपा से सपा में आए दारा सिंह चौहान के लिए सपा ने सुधाकर सिंह का टिकट काट दिया था। ऐसे में एक बार से फिर से उपचुनाव के लिए प्रत्याशियों की घोषणा के साथ ही जिले का सियासी पारा चढ़ गया है। घोसी उपचुनाव के नतीजे भाजपा और सपा के लिए काफी अहम है। 

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राजभर मतदाता निभाएंगे निर्णायक भूमिका 

सपा के सामने घोसी सीट बरकरार रखने की चुनौती है। इस सीट पर राजभर मतदाताओं की संख्या अच्छी खासी है। पिछली बार सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर सपा के साथ थे, जबकि इस बार वह भाजपा के पाले में आ चुके हैं। दारा सिंह चौहान की नोनिया जाति के भी मतदाता यहां निर्णायक भूमिका में माने जाते हैं।

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