राजोरी: घने जंगल में छोटी-सी इस गुफा में छिपे थे खूंखार आतंकी, सेना ने बताया कैसे सफल किया चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन

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Rajouri encounter: Dreaded terrorists hiding in small cave in dense forest

राजोरी मुठभेड़
– फोटो : ANI

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जम्मू संभाग के जिला राजोरी के बाजीमाल के जंगलों में 28 घंटे चली मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों ने दो खूंखार आतंकियों को मार गिराया है। ढंगरी में सात नागरिकों की हत्या और कंडी हमले के मास्टरमाइंड आतंकी कारी सहित दो दहशतगर्दों ढेर किए गए। दोनों के कब्जे से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद मिला है। बुधवार और गुरुवार को हुई मुठभेड़ में दो कैप्टन सहित पांच सुरक्षाबल बलिदान हो गए।

अधिकारियों ने बताया कि यह ऑपरेशन काफी चुनौतियों से भरा था। आतंकी घने जंगलों के बीच संकरी छोटी-सी गुफा में छिपे थे। आतंकवादी छिपने की जगह के रूप में इसका इस्तेमाल कर रहे थे। ऐसे ठिकानों का पता लगाना और उनमें सेंध लगाना काफी कठिन होता है। मुठभेड़ स्थल और उस गुफा को भी साझा किया गया है। इन तस्वीरों को देख कर ही ऑपरेशन की चुनौतियों को अहसास किया जा सकता है।

14 सेक्टर राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडर ब्रिगेडियर सुमित पटनायक ने बताया कि मुठभेड़ में मारा गया आतंकवादी कारी और उसके साथी को पाकिस्तान और अफगानिस्तान में प्रशिक्षित किया गया था। दोनों ऑपरेशन में मार गिराया गया है। बुधवार मुठभेड़ के दौरान रात हो जाने पर यूएवी, रात में सक्षम कैमरा और आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल कर आतंकियों पर नजर बनाई रखी। इसके बाद गुरुवार सुबह एक बार फिर ऑपरेशन शुरू हुआ और दोनों आतंकी ढेर किए गए।

 

राजोरी जिले की कालाकोट सब डिवीजन के धर्मसाल पुलिस थाने के तहत आते बाजीमाल इलाके में बुधवार को दो आतंकी देखने जाने के बाद सुरक्षाबलों ने ऑपरेशन शुरू किया था। नौ घंटे हुई गोलीबारी में दो अफसरों सहित चार जवान बलिदान हो गए थे लेकिन आतंकी नहीं मारे जा सकते थे।

सुरक्षाबलों ने गुरुवार को सुबह आठ बजे फिर से गोलीबारी शुरू की जिसमें सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली और दो आतंकवादी ढेर कर दिए गए। सैन्य सूत्रों ने बताया कि गोलीबारी के दौरान पाकिस्तानी आतंकवादी कारी मारा गया है।

कौन था आतंकी कारी

आतंकी कारी को पाक और अफगान मोर्चे पर प्रशिक्षित किया गया था और वह लश्कर-ए-तैयबा का खूंखार आतंकवादी कमांडर था। वह पिछले एक साल से अपने ग्रुप के साथ राजोरी और पुंछ में सक्रिय था। कारी को आतंकवाद को पुनर्जीवित करने की जिम्मेदारी मिली थी।

वह आईईडी लगाने, गुफाओं से छिपकर हमला करने और प्रशिक्षित स्नाइपर भी था। उधर, मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों ने कालाकोट सब डिविजन के जंगलों में गहन तलाशी अभियान चलाया है।

दो दिन तक चली मुठभेड़ में सेना के दो कैप्टन 9 पैरा के शुभम गुप्ता, कालाकोट स्थित सेना की 63 आरआर के एमवी प्रांजल, 9 पैरा के हवालदार कमांडो अब्दुल माजिद और दो अन्य जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया है।



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